बड़ी खबर : पानी के लिए किया आंदोलन तो मिले मुकदमें,अब मुकदमें वापसी के लिए आंदोलन व्यथा पहाड़ की

कार्तिक उपाध्याय :-कुमाऊं

कहां तो तय था चरागाहं हर एक घर के लिए 

कहां चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए 

जी यह लाइन इसलिए लिखी जानी पड़ रही है क्योंकि वर्तमान में उत्तराखंड के हालात कुछ ऐसे ही है,जब अलग राज्य निर्माण आंदोलन हुआ उसका मुख्य उद्देश्य हर घर पानी रोजगार,शिक्षा,स्वास्थ्य आदि इत्यादि मूलभूत सुविधाएं पहाड़ी राज्य के लोगों को मिले यही था,परंतु राज्य बनने के बाद आज भी यह उद्देश्य पूरे होते नजर नहीं आ रहे ।

कुछ ऐसा ही है हाल पिथौरागढ़ जनपद के विकासखंड बेरीनाग गांव उडियारी का हैं जहां पिछले कई समय से पानी की समस्या बनी हुई है,जिसको लेकर लगातार ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं ।

पिछले महीने की बात है ग्रामीणों द्वारा पूर्व में प्रशासन को सूचना देकर उडियारी से थल को जोड़ने वाली सड़क में आंदोलन किया गया,जिस पर 40 महिलाओं सहित ग्राम प्रधान क्षेत्र पंचायत,जिला पंचायत पर मुकदमे दर्ज कर दिए गए,जिसे प्रमुखता से पर्वतजन  ने छापा था ।

हालांकि पानी अभी भी नहीं पहुंचा लेकिन आंदोलन की राह जरूर बदल गई,यह ग्रामीण पहले पानी के लिए आंदोलन कर रहे थे और अब आंदोलन जो हो रहा है वह ग्रामीणों पर लगे मुकदमे वापसी के लिए किया जा रहा है ।

क्षेत्रीय विधायक द्वारा आश्वासन ग्रामीणों को जरूर दिया गया की ग्रामीणों पर मुकदमें जो लगे हैं वह वापसी जल्द किए जाएंगे ।

वही पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी जब उडियारी पहुंचे थे,तो उन्होंने भी ग्रामीणों पर लगे मुकदमों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।

आश्वासन सिर्फ आश्वासन रहे ना ही मुकदमे वापसी हुए हैं ना ही ग्रामीणों को पानी मिल पाया हैं।

पर्वतजन ने जब इस संदर्भ में एसडीएम बेरीनाग अनिल शुक्ला जी से वार्ता करी तो उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की जो मुख्य समस्या थी पानी की उसे खत्म करने के लिए ग्रामीणों को प्रशासन द्वारा आश्वस्त किया गया था,जिस पर काम हो रहा है बात रही मुकदमे की तो वह शासन ही वापस ले सकता है प्रशासन उसमें कुछ नहीं कर सकता ।

वही उडियारी ग्राम प्रधान दीपा देवी जी से बात करने पर उन्होंने कहा कि *”एक तरफ तो सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है जिसके लिए बड़े-बड़े मंच तक सजाएं जाते हैं लेकिन महिला की दिनचर्या पानी से ही शुरू होती है और पहाड़ के हालात किसी से नहीं छुपे हैं,अगर पानी ही नहीं होगा तो महिला कैसे घर चलाएं,दीपा जी ने बताया कि गांव की महिलाएं लगभग 2 से 3 किलोमीटर दूर पहाड़ की चढ़ाई कर पानी लेकर आती है और यह समस्या आज नहीं बहुत पुरानी चली आ रही है,महिला सशक्त तब ही हो पाएंगी जब मूलभूत सुविधाएं हो,आज गांव के हालात यह है हम किसी दूसरी तरफ नहीं सोच पाते क्योंकि हमारे पास पूरे परिवार के लिए सबसे पहले पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी है जिस पर हमारा पूरा दिन लग जाता है,समस्या लेकर ग्राम प्रधान के पास ही गांव के लोग आते हैं मैं सरकार को दो टूक कहना चाहती हूं अगर सरकार जल्द मुकदमें वापसी नहीं लेती है और पानी की सुचारू व्यवस्था नहीं होती है तो मैं गांव की सभी महिलाओं को साथ लेकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना देने के लिए मजबूर होंगी,मुझे प्रधान के पद से लगाव नहीं है,मुझे क्षेत्र की जनता ने निर्विरोध चुना यदि आज मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पाई तो मेरा ग्राम प्रधान के पद पर रहना व्यर्थ हैं।

जिला पंचायत सदस्य पिंकी कार्की ने कहा कि “यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें लंबे समय से पानी के लिए आंदोलन करना पड़ रहा था लेकिन अब आंदोलन मुकदमे वापसी करने के लिए करना पड़ रहा है, लगातार क्षेत्र पंचायत ग्राम पंचायत जिला पंचायत की बैठकों में इस समस्या को लेकर सभी जनप्रतिनिधियों हमेशा चर्चा की है सरकार को हम जनप्रतिनिधियों को सहयोग करना चाहिए क्योंकि कहीं से कहीं तक ग्रामीणों की मांग गलत नहीं हैं, जल्द से जल्द महिलाओं पर लगी मुकदमे वापसी हैं और पानी हर घर पहुंचे अन्यथा हम पंचायत सदस्य सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे।

यह बड़ी चिंताजनक स्थिति है कि देवभूमि उत्तराखंड से ही भारत को जोड़ने वाली सांस्कृतिक महारेखा मां गंगा निकलती है जो पूरे भारत को अपने जल से जीवंत रखती हैं,वही देवभूमि उत्तराखंड में पानी के लिए आंदोलन करना पड़ता है और उस पर ही मुकदमे कर दिए जाते हैं,हमें उम्मीद है राज्य सरकार इसे गंभीरता से लें और जल्द से जल्द ग्रामीणों की मांग मानी जायें और पूरे गांव को पानी मिलेगा।

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