मोरी के सुदूरवर्ती गांवों में महक रही केसर और जड़ी-बूटियों की खुशबू, किसानों की मेहनत लाई रंग

पुरोला।27 मार्च 2025

नीरज उत्तराखंडी 

  • मोरी विकासखंड के सुदूरवर्ती गांवों में महक रही केसर की ख़ुशबू।
  • मोरी की बडासु प‌ट्टी के ओसला, गंगाड, ढाटमीर व पवाणी गांव में हो रहा उत्पादन
  • तीन वर्षों में चार गांव के सैकड़ों किसानों ने शुरू किया कूट व अतीश की खेती का काम

पानी से नहाने वाले महज लिवास बदलते हैं
जो पसीने से नहाते हैं वे ही दुनिया बदलतें हैं
ऐसा ही कुछ कर दिखाया मोरी विकासखण्ड के सीमांत गांवों के काश्तकारों ने।
मोरी ब्लाक की बडासु पट्टी के चार गांवों में बेसकीमती औषधीय पादपों के साथ अब केसर की खेती की खुशबू भी महक रही है। यह सम्भव हुआ क्षेत्र के काश्तकारों की कड़ी मेहनत से, जिन्होंने दिन-रात जीतोड़ मेहनत कर बंजर, उबड़-खाबड़ खेतों में औषधीय पौधों के साथ अब केसर की खेती शुरू की है।
गोविंद पशु विहार एवं राष्ट्रीय पार्क क्षेत्र के अंतर्गत बडासु पट्टी के ओसला, गंगाड, ढाटमीर एवं पवाणी गांव के उबड़-खाबड़ खेतों में कभी राजमा की खेती हुआ करती थी। जहां अब गांव के काश्तकारों ने तीन वर्ष पूर्व जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर के प्रोत्साहन से कूट-कुटकी, आतिश, आर्च व वन ककड़ी, केसर आदि औषधीय पौधों की नर्सरी तैयारी की है। अब चारों गांव के 100 से अधिक किसानों ने औषधीय पौधों को वृहद खेती के तौर पर आर्थिक के रूप में अपना कर आजीविका का साधन बना लिया है।
जड़ी बूटी उत्पादक ढाटमीर के इलम दास कहते हैं कि हरकीदून घाटी की बडासु क्षेत्र के ओसला, गंगाड, ढाटमीर व पवाणी में लगभग 70 प्रतिशत परिवारों ने तीन वर्ष पहले जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर की मदद, प्रोत्साहन व बीज उपलब्ध कराने के बाद राजमा वाले खेतों में कूट, अतीश, कुटकी, वन ककड़ी जड़ी-बूटी की खेती करनी शुरू की थी, जो अब तीन वर्ष बाद फसल तैयार हो गई है।
वहीं गंगाड गांव के ठाकुर सिंह, राम सिंह ने जड़ी-बूटी के साथ केसर की खेती भी शुरू कर दी है।
क्षेत्र के ज्योति सिंह, जयबीर सिंह, हरिसिंह, शूरवीर सिंह व प्रवीण सिंह व राजेंद्र सिंह, सेम सिंह, ठाकुर सिंह, जगजीत गंगाड ने बताया कि गोपेश्वर शोध संस्थान में पंजीकृत व लाइसेंस जारी करने एवं गोविंद पशु विहार पार्क प्रशासन से निकासी जारी करने के बाद विपणन की व्यवस्था फिलहाल शोध संस्थान के जिम्मे है।
क्या कहते हैं अधिकारी
– सांकरी रेंज के ओसला, ढाटमीर, गंगाड व पवाणी चार गांव में जड़ी-बूटी उत्पादक किसान ने वृहद स्तर पर कुटकी कूट, अतीश एवं वन ककड़ी की खेती कर रहे हैं, पार्क प्रशासन की ओर से जड़ी-बूटी विशेषज्ञों के माध्यम से समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, साथ ही कुछ उत्पादकों की विपणन को निकासी को आवेदन किया गया है। वहीं, ठाकुर सिंह राम सिंह नामक व्यक्ति ने केसर की खेती भी शुरू कर दी है, जो बहुत ही सराहनीय कार्य है।
——गौरव अग्रवाल, रेंज अधिकारी सांकरी रेंज पार्क क्षेत्र ।

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