भारत-पाक तनाव: साइबर हमले की आशंक। एसटीएफ अलर्ट, एडवाइजरी जारी ..

देहरादून। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच साइबर हमले की आशंका को देखते हुए उत्तराखंड एसटीएफ (विशेष कार्य बल) पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। एसटीएफ ने अपने साइबर कमांडो को सक्रिय कर दिया है और संदिग्ध इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी सेल गठित की है।

प्रदेशवासियों के लिए एसटीएफ ने एक विशेष एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि इस संवेदनशील माहौल में आम नागरिकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हाई अलर्ट: सरकारी सिस्टम पहले भी बन चुका है निशाना

गौरतलब है कि पिछले वर्ष अक्तूबर में राज्य के कई सरकारी वेबसाइट्स को साइबर हमले का सामना करना पड़ा था। उस दौरान सरकारी पोर्टलों का डेटा चोरी हुआ था और कई वेबसाइटें कई दिनों तक बंद रही थीं। ऐसे में इस बार संभावित खतरे को भांपते हुए पहले से ही चौकसी बरती जा रही है।

साइबर कमांडो और निगरानी टीम सक्रिय

एसटीएफ ने हाल ही में प्रशिक्षित चार साइबर कमांडो और 10 अन्य अधिकारियों को निगरानी सेल में शामिल किया है। ये सभी अधिकारी 24 घंटे एक्टिव रहकर इंटरनेट पर चल रही गतिविधियों पर नजर रखेंगे। संदिग्ध वेब पेज, लिंक, सोशल मीडिया अकाउंट्स और नकली कमाई वाले ऑफर्स को ट्रैक कर ब्लॉक किया जा रहा है।

एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर के अनुसार, सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के साइबर थानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

क्या करें, क्या न करें: एसटीएफ की एडवाइजरी

क्या करें:

  • सिर्फ आधिकारिक जानकारी साझा करें।

  • किसी भी फोटो/वीडियो की पुष्टि के बाद ही शेयर करें।

  • फर्जी खबरों और अकाउंट्स को तुरंत रिपोर्ट करें।

  • सोच-समझकर पोस्ट करें।

क्या न करें:

  • सेना या सुरक्षा बलों की तैनाती से जुड़ी कोई जानकारी साझा न करें।

  • अफवाह, भड़काऊ या असत्यापित जानकारी ना फैलाएं।

  • किसी अनजान बैंक खाते को सरकार की मदद समझकर पैसे न भेजें।

  • संदिग्ध लिंक, ईमेल और अटैचमेंट्स पर क्लिक न करें।

  • किसी भी अनधिकृत ऐप को डाउनलोड न करें।

साइबर धोखाधड़ी होने पर क्या करें?

  • हेल्पलाइन नंबर: 1930 पर तुरंत कॉल करें।

  • ऑनलाइन शिकायत: cybercrime.gov.in पर करें।

कौन हैं साइबर कमांडो?

साइबर कमांडो वे पुलिसकर्मी हैं जिन्हें गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित परीक्षा के बाद देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT और फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी से विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उत्तराखंड पुलिस के चार जवानों ने यह परीक्षा पास की है, जिनमें से दो ने देशभर में टॉप 10 में स्थान प्राप्त किया है।

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