उत्तरकाशी, 22 जुलाई 2025 —नीरज उत्तराखंडी
जनपद में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की पहल रंग ला रही है। उनके निर्देशों पर गंभीर जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय रहते चिकित्सा सहायता और सुरक्षित प्रसव सुविधा मिल रही है। जुलाई माह में अब तक 14 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव सफलतापूर्वक कराया गया है।
प्रशासन बना सारथी, जागी नई उम्मीद
जिलाधिकारी ने मानसून और संभावित आपदा के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए थे कि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में विशेष सतर्कता बरती जाए। इसके तहत ऐसे मामलों की पहचान, निगरानी और समय पर अस्पताल में शिफ्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
स्वास्थ्य विभाग की तत्परता का ही परिणाम है कि नौगांव ब्लॉक में 3, डुंडा में 2, पुरोला में 1 और मोरी ब्लॉक में 8 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया। इन महिलाओं में मोरी ब्लॉक की दणगांण गांव की सुनीता, डुंडा की रमा देवी और नौगांव की मोनिका जैसी महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें समय रहते मदद मिल पाई।
स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट, चलाया गया विशेष अभियान
जिलाधिकारी के आदेश के बाद स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। 20 जुलाई 2025 तक दर्जनों हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों पर शिफ्ट किया गया। इनमें से 14 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एम्बुलेंस सेवा पूरे समन्वय के साथ इस अभियान में जुटी हुई हैं।
क्या थे जिलाधिकारी के निर्देश?
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए थे कि:
- सभी सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल हाई-रिस्क महिलाओं की नियमित एवं विशेष प्रसवपूर्व जांच करें।
- दुर्गम क्षेत्रों से महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए एम्बुलेंस और ट्रांसपोर्टेशन की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
- आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐसे मामलों की जानकारी रखें और समय पर विभाग को सूचित करें।
यह पहल उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जनपद में गंभीर जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
जिलाधिकारी की सक्रियता और स्वास्थ्य विभाग के समर्पण ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो जमीनी स्तर पर बदलाव संभव है।
यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय बन सकता है, जहां प्राकृतिक आपदाएं और दुर्गम भूगोल गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को चुनौती देते हैं।




