देहरादून, जुलाई 2025 – उत्तराखंड की चिकित्सा व्यवस्था ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देहरादून स्थित श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में पहली बार रोटारेक्स मेकेनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी एथरेक्टॉमी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह प्रदेश में अपने तरह की पहली इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी आधारित प्रक्रिया है, जो मरीज की जान बचाने में मील का पत्थर साबित हुई।
मार्च 2025 में अस्पताल की कैथ लैब में की गई इस उच्च तकनीक प्रक्रिया में परिधीय धमनी रोग (Peripheral Arterial Disease) से पीड़ित एक मरीज की अवरुद्ध धमनी को सफलतापूर्वक खोलकर अंग में रक्त प्रवाह दोबारा शुरू किया गया। इससे मरीज को गंभीर अंग इस्कीमिया (Critical Limb Ischemia) जैसी जानलेवा स्थिति से बचा लिया गया।
सफलता की टीम:
इस ऐतिहासिक चिकित्सा प्रक्रिया का सफल नेतृत्व डॉ. प्रशांत सरड़ा (प्रमुख एवं कंसल्टेंट इंचार्ज), डॉ. रोहित शर्मा और डॉ. सन्नी मिश्रा (कंसल्टेंट्स, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी) ने किया। इस टीम को तकनीशियन और नर्सिंग स्टाफ के समर्पित सहयोग से यह सफलता मिली।
आगे भी जारी हैं सफलताएं:
इस पहली प्रक्रिया के बाद से अस्पताल में रोटारेक्स मेकेनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी की कई और सफलताएं दर्ज की जा चुकी हैं। सभी में मरीजों को अत्यंत सकारात्मक और जीवनदायी परिणाम मिले हैं।
उत्तर भारत में अग्रणी बना अस्पताल:
यह उपलब्धि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को उत्तराखंड ही नहीं, पूरे उत्तर भारत में एंडोवास्कुलर इंटरवेंशन क्षेत्र का अग्रणी संस्थान बना देती है। यहां अब न केवल उच्च तकनीक आधारित उपचार उपलब्ध हैं, बल्कि रोगी-केंद्रित सेवा और चिकित्सा गुणवत्ता का भी एक आदर्श प्रस्तुत किया जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन ने इस उपलब्धि पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी अत्याधुनिक तकनीकों और विश्वस्तरीय उपचार विधियों को अपनाया जाएगा ताकि राज्य और देश के हर कोने से आने वाले मरीजों को बेहतर जीवन मिल सके।




