वीडियो: सरकार से उठा भरोसा। भगवान को सौंपा ज्ञापन

गिरीश गैरोला चमियारी -उलण मोटर मार्ग की मांग को लेकर एक महीने से धरने पर बैठे ग्रामीण अब भगवान भरोसे बाबा विश्वनाथ को सौंपा ज्ञापन देकर मौन व्रत धारण कर गए शिवशंकर के शेर उत्तरकाशी जिले में अपने गांव उलण तक स्वीकृत सड़क पर निर्माण शुरू करने की मांग को लेकर एक महीने से यमनोत्री […]

गिरीश गैरोला
चमियारी -उलण मोटर मार्ग की मांग को लेकर एक महीने से धरने पर बैठे ग्रामीण अब भगवान भरोसे
बाबा विश्वनाथ को सौंपा ज्ञापन देकर मौन व्रत धारण कर गए शिवशंकर के शेर
उत्तरकाशी जिले में अपने गांव उलण तक स्वीकृत सड़क पर निर्माण शुरू करने की मांग को लेकर एक महीने से यमनोत्री विधान सभा के पिपलनखंडा में धरने पर बैठे ग्रामीणों का अब सरकार तथा प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठ चुका है। लिहाजा विश्वनाथ चौक पर लोक निर्माण विभाग का पुतला दहन करने के बाद वयो वृद्ध आंदोलनकारी  शेर सिंह राणा ने जिला प्रशासन की बजाय भोले बाबा विश्वनाथ के मंदिर में अपना ज्ञापन प्रेेेषित किया।
शिव लिंग के सामने भोले के  पुजारी को ज्ञापन देकर सरकार और उसके प्रशासन को सदबुद्धि की प्राथना की, ताकि उलण गांव तक सड़क निर्माण हो सके। इसके बाद उन्होंने मौन धारण कर लिया है।
आंदोलनकारी ग्रामीण शिव शंकर पैन्यूली ने बताया कि वे वर्ष 2013 से अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं । किंतु हर बार उन्हें खोखला आश्वासन देकर उठा लिया जाता है। इस बार अपनी ही सरकार और विधायक से नाराजी जताते हुए पैन्यूली कहते हैं कि बुजुर्ग शेर सिंह राणा को धरने में हार्ट अटैक होने के बाद परिजनों द्वारा हायर सेंटर ले जाया गया किन्तु किसी भी अधिकारी अथवा नेता ने उनकी सुध नही ली। उन्होंने बताया कि खराब स्वास्थ्य के बाद परिजनों के समझाने पर भी शेर सिंह रुके- थके नही बल्कि अस्पताल से भोले शिव के दरबार में अपनी अंतिम इच्छा प्रकट कर धरना स्थल पर जाकर सड़क निर्माण होने तक मौन ब्रत धारण कर लिया है। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण शुरू होने के बाद ही वे अपना मौन व्रत तोड़ेंगे। आंदोलनकारी शिव शंकर पैन्यूली ने
 आक्रोश जताया कि धरने पर एसडीएम और विभागीय अधिकारियों के साथ पंहुचे bjp  विधायक ने ठीक तरह से कार्य की समीक्षा नही की और न उचित दिशा निर्देश अधिकारियों को दिए।
 उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद अपने ही पार्टी के और अपने ही मतदाता  ग्रामीणों से पशु समान व्यवहार किया गया जो उन्हें कतई मंजूर नही है। लिहाजा वे 26 से 28 फरवरी तक संबंधित विभागों के कार्यालय में तालेबंदी और विरोध प्रदर्शन करेंगे और फिर अंतिम हथियार के रूप में 5 फरवरी से आमरण अनशन शुरू कर देंगे।
गौरतलब है कि इसी सड़क मार्ग निर्माण न होने से ग्रामीणों ने गांव में रिश्तेदारों द्वारा रोटी-बेटी का रिश्ता टूटने की संभावना जताई थी और इसीलिए इस बार आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंका है।

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