मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली। हालिया सत्रों में आई तेज़ उछाल के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली के चलते दोनों कीमती धातुएं सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आईं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने कीमतों में बड़ी गिरावट को थामे रखा है।
ताज़ा बाजार भाव
आज MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.25% की गिरावट के साथ ₹1,60,741 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। वहीं मार्च डिलीवरी की चांदी में अपेक्षाकृत अधिक दबाव देखने को मिला और यह 1.16% फिसलकर ₹2,65,200 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले के सत्र में सोने में 0.74% और चांदी में 3% की तेज़ बढ़त दर्ज हुई थी, जिसके बाद ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू किया।
कीमतों को संभालने वाले प्रमुख कारण
कमज़ोर डॉलर का असर
डॉलर इंडेक्स 0.13% घटकर 97.58 पर आ गया। डॉलर के कमजोर होने से अन्य मुद्राओं में निवेश करने वालों के लिए सोना और चांदी अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे मांग को समर्थन मिलता है।
टैरिफ नीति और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी टैरिफ नीतियों और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अलग रुख ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है। कुछ देशों पर 15% या उससे अधिक शुल्क की संभावना ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की आकर्षण को बनाए रखा है।
भू-राजनीतिक तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है। 27 फरवरी को जिनेवा में प्रस्तावित परमाणु वार्ता के तीसरे दौर पर बाजार की विशेष नजर है।
आगे का रुझान
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यम और लंबी अवधि में सोना और चांदी का रुख सकारात्मक बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिलहाल $5,100 से $5,300 के दायरे में स्थिर है।
वहीं चांदी के लिए $92–$96 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस स्तर को पार करने पर यह $100–$105 तक जा सकती है।
MCX तकनीकी स्तर
सोना
सपोर्ट: ₹1,60,000 / ₹1,57,700
रेजिस्टेंस: ₹1,62,500 / ₹1,64,000
चांदी
सपोर्ट: ₹2,63,600 / ₹2,58,800
रेजिस्टेंस: ₹2,74,000 / ₹2,80,000
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सप्ताह के दौरान उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में ऊंचे स्तरों पर आंशिक मुनाफावसूली समझदारी हो सकती है, जबकि नई खरीदारी के लिए कीमतों में सुधार का इंतजार बेहतर रणनीति मानी जा रही है।




