गांव लौटे फौजी ने बदल दी खेती की तस्वीर। बना रोल माॅडल

नवल खाली

उत्तराखंड के फौजी जवानों की वीरता के किस्सों से इतिहास भरा पड़ा है ।
ये वो देवभूमि है जहाँ हर घर से एक फौजी जवान होता है ।

आज हम आपको एक ऐसे ही फौजी जवान की मेहनत ,जज्बे और जनून के किस्से से रूबरू करवाएंगे जिसकी बदौलत आज वो उन युवाओ के लिए रोल मॉडल बने हुए हैं जो पहाड़ो में रहकर कुछ स्वरोजगार करना चाहते हैं । आइये देखिये हमारी ये ग्राउंडजीरो रिपोर्ट-

https://youtu.be/O66RaLDO2o0

 

कोरोना के कहर के बीच उत्तराखंड के पहाड़ों में एक फौजी ने पहाड़ों को आबाद करने की जंग छेड़ी हुई है ।
जहां आज रिटायर्ड होने के बाद अधिकतर सर्विस क्लास देहरादून, हल्द्वानी या अन्य शहरों की तरफ रुख करता है वहीं इस फौजी जवान ने गाँव लौटकर एक बड़ी पहल शुरू की है।

वहीं कोरोना के बाद हजारो की सँख्या में युवा पहाड़ों में लौट चुके हैं । और उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
ऐसे में वर्ष 2018 में रिटायर्ड हुए एक फौजी ने स्वरोजगार की एक नई इबारत लिखी है । और आज युवाओं के लिए एक प्रेरणा का काम कर रहे है ।
चमोली जनपद के घाट ब्लॉक के दूरस्थ गाँव लाखी के रिटायर्ड फौजी राकेश बिष्ट आज सब्जी उदपादन ,डेयरी , और मुर्गी पालन से अच्छा खासा स्वरोजगार कर रहे हैं।

राकेश बताते हैं कि जब वो फौज में थे तभी से ये सोच उनके अंदर थी कि पहाड़ों के लिए कुछ करना है ,इन वीरान होते पहाड़ो को फिर से आबाद करना है ।
उनकी इसी ललक और जनून के बदौलत आज राकेश खुद स्वरोजगार तो कर ही रहे हैं साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं ।
राकेश ,सरकारी सिस्टम के प्रति अपनी पीड़ा भी जाहिर करते हैं और बताते हैं कि शुरआती दौर में उन्होंने कई विभागों के चक्कर काटे पर उन्हें निराशा ही हाथ लगी । फिर उन्होंने खुद के संसाधनों से ही सब्जी ,डेयरी और मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया ।
अब , जब उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इस स्वरोजगार को धरातल पर उतार दिया है तो अब सरकारी नुमाइंदे भी उनके आगे पीछे घूमते रहते हैं ।
क्योंकि उनकी इस मेहनत को सरकार अब अपने खाते में जोड़कर अपनी उपलब्धियों में शामिल करने का काम करेगी ।

पर जमीनी हकीकत अभी भी यही है कि जो युवा स्वरोजगार करना चाहते हैं ,सरकारी सिस्टम की उदासीनता उन्हें झेलनी पड़ती है। यही वजह है कि उत्तराखंड के अधिकांश युवा आज भी स्वरोजगार तो करना चाहते हैं पर उन्हें सरकारी सिस्टम की उदासीनता का शिकार होना पड़ता है। ।
बहरहाल ,आज पहाड़ों के इस फौजी जवान ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जिससे युवाओ को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

आज उत्तराखंड में बेरोजगारों का आंकड़ा लगभग 10 लाख है वहीं कोरोना की इस महामारी के बाद हजारों की संख्या में युवा रिवर्स पलायन करके पहाड़ों में वापस भी लौट चुके हैं तो उनके लिए भी सरकार को जल्द स्वरोजगार की एक ठोस नीति तैयार करने की आवश्यकता है ।
पहाड़ों के जल ,जंगल ,जमीन और जवानी के सही इस्तेमाल का वक्त आ चुका है ,इसके लिए एकजुट होकर स्वरोजगार की दिशा के आगे बढ़ने की आवश्यकता होगी ।

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