मुख्यमंत्री राहत कोष से ज्यादा भरोसा प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दिखा रहे उत्तराखंड के दानदाता

देहरादून। उत्तराखंडवासियों का देशभक्ति का जुनून आजकल देखते ही बनता है। वह सीधे प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान कर रहे हैं। लेकिन जानकार दानदाताओं की इस पहल का स्वागत करने के बावजूद हैरानी भी जता रहे हैं कि मुख्यमंत्री राहत कोष में दान न करने की आखिर क्या वजह हो सकती है?

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के पास देश के सभी राज्य हैं और अन्य राज्यों में कोरोना महामारी का ज्यादा प्रकोप होने से अधिकांश फंड उन्हीं राज्यों में खर्च हो जाएगा। उत्तराखंड को इसका बहुत कम फायदा मिल पाएगा।

ज्यादा बेहतर तो यह होता कि उत्तराखंड के लोग मुख्यमंत्री राहत कोष में ही पैसा जमा करा दें, किंतु सवाल यह है कि लोगों को ऐसा करने के लिए राजी कैसे किया जाए !

कोरोना संक्रमण की इस महामारी के बीच उत्तराखंड से भी लोग कोरोना से लडऩे के लिए देश को बढ़-चढ़कर अपना आर्थिक सहयोग दे रहे हैं, ताकि कोरोना की महामारी से निपटने में उनकी ओर से की गई मदद देश के काम आ सके।


चमोली स्थित गौचर की दानवीर देवकी ने तो अपने जीवनभर की जमा पूंजी ही कोरोना से लडऩे के लिए दान कर दी। उन्होंने अपनी 10 लाख की एफडी तोड़कर सीधे पीएम केयर्स फंड को दान दी है।

उरतराखंड में कोरोना की इस महामारी के बीच गौर करने वाली बात यह भी है कि उत्तराखंड से अधिकांश लोग अपने राज्य के मुख्यमंत्री राहत कोष में दान न करके सीधे प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान किया जाने वाला पैसा जमा कर रहे हैं।
आखिर ऐसा क्यों? हालांकि इसका अर्थ यह भी लगाया जा रहा है कि उत्तराखंड के लोगों को मुख्यमंत्री राहत कोष से ज्यादा भरोसा पीएम केयर्स फंड पर है। लोगों को यकीन है कि पीएम केयर्स फंड में भेजा गया पैसा सही और सुनियोजित तरीके से देश और प्रदेश के हित में कोरोना से लडऩे के लिए खर्च होगा।


उत्तराखंड सरकार की विश्वसनीयता पर तब सवाल खड़े होते हैं, जब पता चलता है कि स्वास्थ्य कर्मियो को दिए गए मास्क की क्वालिटी इतनी घटिया है कि कर्मचारी भी उनको पहनने से कतरा रहे हैं, क्योंकि उनमें न तो कोई फिल्टर है और मास्क का कपड़ा टिश्यू पेपर से भी हल्का बताया जा रहा है।


पीएम केयर्स फंड में दान देने वाले उत्तराखंड के अधिकांश दानदाताओं का कहना है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर सीधे पीएम केयर्स फंड में दान दे रहे हैं। हालांकि यह ठीक भी है, लेकिन अभी तक यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री राहत कोष से लोग दूरी बना रहे हैं या सूबे के मुख्यमंन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से!

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