एक्सक्लूसिव : मैनेजर ने बांटा एक करोड़ का फर्जी लोन। पहले सस्पेंड, फिर बहाल, अब प्रमोशन। डस्टबिन में जांच

देहरादून के जिला सहकारी बैंक में आजकल जंगलराज चल रहा है देहरादून के विभिन्न बैंकों से अपने चहेतों को फर्जी लोन बांटकर जिला सहकारी बैंक देहरादून को एक करोड़ से भी अधिक का चूना लगाने वाले बैंक मैनेजर को आजकल इनाम के तौर पर सीनियर बैंक मैनेजर बनाए जाने की तैयारी है।यह अलग बात है कि फर्जी लोन बांटने के मामले में इस मैनेजर के खिलाफ आरबीआई से लेकर विभागीय जांच भी लंबित है, वहीं फर्जी बैंक लोन प्रकरण में देहरादून की कैंट पुलिस में भी मुकदमा दर्ज है लेकिन इन सभी जांच प्रकरणों का क्या हुआ जहां कोई बोलने को तैयार नहीं है।
गौरतलब है कि देहरादून में जिला सहकारी बैंक के एक मैनेजर एनके शर्मा ने एक करोड़ रुपये से भी अधिक फर्जी लोन बांट दिया था। जब यह मामला उठा तो आंखों में धूल झोंकने के लिए कुछ समय के लिए मैनेजर को सस्पेंड कर दिया था लेकिन इसके बावजूद भी मैनेजर की कार्यशैली नहीं बदली सस्पेंशन के दौरान ही मैनेजर को बचाने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों से लेकर के सरकार के बड़े-बड़े नेताओं के भी दबाव काम आए और मैनेजर फिर से बहाल हो गए और अब इनाम स्वरूप उन्हें मुख्यालय में अटैच करने के बाद सीनियर बैंक मैनेजर बनाए जाने की तैयारी हो रही है।
इस दौरान एक बोर्ड मीटिंग भी हो गई है लेकिन उसमें भी मैनेजर के इन वित्तीय घपले घोटालों का कोई ध्यान नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि पिछले दिनों आला अधिकारियों के संरक्षण में बैंक मैनेजर ने अपने एजेंटों के साथ मिलकर सहकारी बैंक को एक करोड़ रुपए से भी अधिक का चूना लगाया था।

देहरादून मे जिला सहकारी बैंक के मैनेजर एनके शर्मा ने फर्जी एजेंटों के साथ मिलकर लाखों के ऋण बांट दिए। अब किस्तें नहीं आने पर आला अधिकारियों की हवाइयां उड़ी हुई हैं।
 पहले तो आंखों में धूल झोंकने के लिए मैनेजर को सस्पेंड कर दिया गया और अब मामला ठंडा पड़ने पर बहाल कर दिया गया है।
आला अधिकारियों की इस हरकत से बैंक लगातार घाटे मे चल रहे हैं।
 गौरतलब है कि देहरादून में सहकारी बैंक से लोन दिलाने के नाम पर एक शंकर थापा नाम के एजेंट ने किशनपाल और उसके भाई को फांस कर उनके दस्तावेज ले लिए और फिर उन्हें केंद्रीय संस्थान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का कर्मचारी दिखाकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए। इसके बाद जिला सहकारी बैंक के मैनेजर एनके शर्मा को अपने साथ मिलाकर छह लाख रुपए का लोन लेकर चंपत हो गया। इसके कुछ समय बाद मैनेजर ने भी अपना ट्रांसफर किस शाखा से अन्यत्र करवा दिया। जिस नई शाखा में यह मैनेजर ट्रांसफर होकर कि गए वहां भी उन्होंने इसी तरह से फर्जी लोन करवा दिए और उनकी भी अब किस्तें  नहीं आ रही है।
 जब नए मैनेजर आए और किस्तें ना जाने पर  बैंक के कर्मचारियों ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से संपर्क किया तो पता चला कि वहां पर किशनपाल आदि के नाम से कोई भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है।
 बैंक ने किशनपाल और उनके भाई से पूछताछ की तो पता चला कि किशनपाल को तो लोन मिला ही नहीं था। अब किशनपाल ने गढ़ी कैंट थाने में तहरीर दी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच कर रही है।
 लेकिन अहम सवाल यह है कि जब यह लोन फर्जी तरीके से तो दिया गया था तो फिर बैंक ने अपनी ओर से इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की !
 दूसरा सवाल यह है कि लोन देने वाले मैनेजर को सहकारी बैंक ने सिर्फ दिखावे के लिए सस्पेंड तो कर दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा उन्हें फिर से बहाल कर दिया। इस मैनेजर के द्वारा अन्यत्र भी लाखों के लोन इसी तरह से बांट करके बैंक को जबरदस्त चूना लगाया जा चुका है। किंतु वह सारे मामले दबाने की तैयारी हो चुकी है।
इस प्रकरण पर गढ़ी कैंट पुलिस का कहना है कि अभी जांच प्रचलित है।
रजिस्ट्रार बीएम मिश्र का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था अब आ गया है तो वह इसकी अपने स्तर पर जांच करेंगे तथा संबंधित अधिकारियों से पूछेंगे और यदि मामला तथ्यात्मक पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किंतु इन प्रकरणों को घटित हुए लगभग 6 महीने से भी अधिक हो गए हैं। उल्टा मैनेजर को सीनियर ब्रांच मैनेजर बनाए जाने की तैयारी हो रही है।
ऐसे में समझा जा सकता है कि जिला सहकारी बैंक देहरादून अगर भविष्य में डूबता है तो इसे डुबाने में किन नेताओं और अधिकारियों का हाथ सामने आएगा !

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