ये दो चित्र नम हो जाएंगी आपकी भी आंखें

अमित तोमर

यह दो चित्र देख आज आंखों में पानी उतर गया।
6 दिन बाद एक बाप अपने दो मासूम बच्चो से मिलने घर पहुंचा तो बस जाली के दरवाजे से ही अपने जिगर के टुकड़ों को देख सका। हाँ! यह खाकीधारी है पर उससे पहले इंसान भी। यह लोकेंद्र बहुगुणा जी है, हाल चौकी प्रभारी लक्ष्मण चौक, कोतवाली देहरादून।


आज 6 दिन बाद पहली बार लोकेंद्र भाई अपने 4 और 7 साल के बच्चो से मिलने अन्तः चौकी से घर गए, चौकी में और घर मे महज़ 8 किलोमीटर का अंतर है, और तन पर खाकी हो तो कौन रोक सकता है पर इस अफसर ने परिवार से ऊपर कर्तव्य को चुना । घर पहुंचे तो बच्चे अपने बाप को एक सप्ताह बाद देख दौड़ पड़े। स्वाभाविक ही था, पर यह अफसर घर के बाहर ही रहा और बच्चो को 10 फिट दूर दरवाज़े से ही देखता रहा।

एक सप्ताह में हज़ारों लोगों के संपर्क में आये होंगे तो अपने परिवार की सुरक्षा के लिए अपने ही घर मे गैर बन गए और बाहर आंगन में बैठ पत्नी-बच्चो से बतियाते रहे। पत्नी ने खाना भी बाहर ही रख दिया जिसे कुछ मिनट में निबटा पुनः यह अधिकारी हमारी रक्षा को सड़कों पर उतर आया। बस पत्नी-बच्चो को 10 फिट दूर से देख आया।
यह वास्तविक ज़िंदगी के हीरो है, काल्पनिक नही।
भारत की जनता अभी भी कोरोना को जिस प्रकार मज़ाक में ले रही है यह उद्धरण उनके लिए है। कितना मुश्किल होगा इस बाप के लिए अपने 4 और 7 साल के बच्चों से ना मिल पाना, पत्नी से बात ना कर पाना और बैरंग वापस ड्यूटी पर लौट आना।
लोकेंद्र भाई ने यह चित्र सावर्जनिक करने से मुझे मना किया है, पर भाई आपके माध्यम से लाखों मूर्ख शायद जाग जाए और सड़कों पर ना उतरे। क्षमा प्रार्थी हूँ पर यह चित्र साझा कर रहा हूँ।
और यह कहानी किसी अकेले लोकेंद्र की नही अपितु हर खाकीधारी की है।
नमन तुम्हारे श्री चरणों मे भारत के पुलिसकर्मियों। तुम हो तो हम है।

यमुनोत्री चौकी प्रभारी लोकेंद्र बहुगुणा जी को सराहनीय सेवा मैडल मिलने पर हार्दिक बधाई। आप सच में इस मैडल के हकदार है। देव पुलिस उत्तराखंड, गर्व है खाकी पर।

सेवा भाव के लिए पहले भी मिली बधाई

दिनांक- 05/06/2018 को यमुनोत्री चौकी इंचार्ज #एस0आई0_लोकेन्द्र_बहुगुणा मय स्टाफ के जाम खुलवाने हेतु पैदल भैरो घाटी से ऊपर के मोड़ों पर गये हुए थे जहाँ पर जाम खुलवाते वक्त वहाँ पर मध्य प्रदेश से आये यात्री रांझी राजक के अचानक सीने मे दर्द होने के कारण जमीन पर गिर गया जिसे देख एस0आई0 लोकेन्द्र बहुगुणा द्वारा उसे घोड़े पर बिठाने की कोशिश की गयी परन्तु सीने मे अत्यधिक दर्द के कारण वह घोडे पर संभल नही पा रहा था यात्री की तबीयत ज्यादा बिगड़ते देख एस0आई0 लोकेन्द्र बहुगुणा ने पालकी/डोली का इंतजार किये बिना मानवता की मिसाल पेश करते हुये यात्री को तुरंत अपनी पीठ पर लादकर लगभग 02 किलोमीटर पैदल ले जा कर प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र यमुनोत्री पहुँचाया जहाँ पर इलाज के बाद डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि अगर इस व्यक्ति को हॉस्पिटल लाने मे थोड़ी देर हो जाती तो लो ब्लड प्रेशर व हार्टअटैक के कारण से इनकी मृत्यु भी हो सकती थी।

पर्यटक रांझी राजक उपरोक्त द्वारा इलाज के बाद नम आँखों से उपनिरीक्षक लोकेन्द्र बहुगुणा के पैर पडकर उन्हे सीने से लगाकर जान बचाने के लिये आभार प्रकट कर धन्यवाद किया गया। रांझी राजक के साथ आये अन्य पर्यटको द्वारा इस पुलिस अधिकारी के सराहनीय कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई। राहगीरों द्वारा तो पुलिस को भगवान तक की संज्ञा दी गयी।
जय हिन्द

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