डिजिटल जनगणना से बदलेगा उत्तराखंड, 30 हजार मानचित्रों से बनेगी नई तस्वीर

डिजिटल जनगणना से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, 30 हजार मानचित्र और 34 हजार कर्मियों के साथ शुरू होगा बड़ा अभियान   उत्तराखंड में सालों के लंबे अंतराल के बाद देश में जनगणना की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। साल 2011 के बाद पहली बार होने वाली यह जनगणना कई मायनों में […]

डिजिटल जनगणना से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, 30 हजार मानचित्र और 34 हजार कर्मियों के साथ शुरू होगा बड़ा अभियान

 

उत्तराखंड में सालों के लंबे अंतराल के बाद देश में जनगणना की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। साल 2011 के बाद पहली बार होने वाली यह जनगणना कई मायनों में खास और ऐतिहासिक होगी। इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी, जिससे राज्य की सामाजिक, आर्थिक और जनसंख्या से जुड़ी स्थिति की एक विस्तृत और सटीक तस्वीर सामने आएगी।

 

इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहले चरण में मकान सूचीकरण के लिए 30 हजार डिजिटल मानचित्रों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन्हीं मानचित्रों के आधार पर आगे की पूरी गणना तय होगी। मकान सूचीकरण और हाउस होल्ड एन्यूमरेशन के दौरान हर मकान का भौगोलिक स्थान, उसका उपयोग और उसकी संरचना डिजिटल मैपिंग के जरिए दर्ज की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक ये 30 हजार डिजिटल मानचित्र पूरी जनगणना की रीढ़ साबित होंगे।

 

राज्य सरकार और जनगणना निदेशालय की तैयारियों के अनुसार इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए करीब 34 हजार कर्मियों की तैनाती की जाएगी। ये कर्मी मोबाइल एप के माध्यम से घर-घर जाकर आंकड़े दर्ज करेंगे। कागज आधारित फॉर्म की जगह डिजिटल एंट्री होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

 

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना की समय-सारिणी विशेष रूप से तैयार की गई है। ऊंचाई वाले और बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों में यह कार्य अक्टूबर से नवंबर के बीच पूरा कर लिया जाएगा। इसके तहत 131 गांवों के अलावा तीर्थस्थल बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में भी जनगणना की जाएगी। सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और मार्ग बंद होने की वजह से इन क्षेत्रों में समय से पहले गणना कर लेना प्रशासन के लिए अनिवार्य होता है।

 

राज्य के बाकी हिस्सों में जनगणना देशभर के कार्यक्रम के साथ ही आयोजित की जाएगी। तय कार्यक्रम के अनुसार 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच उत्तराखंड के मैदानी और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दौरान प्रत्येक नागरिक से व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक जानकारी ली जाएगी।

 

अब तक देश में जनगणना हर 10 वर्ष में होती रही है, लेकिन इस बार 2011 के बाद सीधे 2027 में आंकड़े सामने आएंगे। यानी 16 वर्षों का अंतराल प्रशासन और नीति निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। अधिकारी न केवल नए आंकड़े एकत्र करेंगे, बल्कि 2011 की जनगणना से तुलना कर यह भी विश्लेषण करेंगे कि आबादी, शहरीकरण, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में कितना बदलाव आया है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से प्राप्त आंकड़े आने वाले वर्षों में राज्य की विकास योजनाओं की दिशा तय करेंगे। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, पेयजल और रोजगार जैसी योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाएंगी।

 

इस तरह यह जनगणना सिर्फ आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास और भविष्य की योजना निर्माण का आधार बनने जा रही है।

Also Read This

बड़ी खबर: भाजपा के 32 विधायकों पर लटकी तलवार। दिल्ली में होगा तय किसका कटेगा टिकट!

देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी बीच पार्टी के...

बड़ी खबर: दिल्ली में आज भाजपा उत्तराखंड कोर ग्रुप की अहम बैठक।  हारी हुई सीटों पर फोकस

देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं।इसी...

Related Posts