जंगल में घायल बुजुर्ग, एंबुलेंस नदारद! दो घंटे बाद निजी वाहन से पहुंचा अस्पताल

जनपद उत्तरकाशी के दूरस्थ मोरी विकासखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। जंगल में भेड़-बकरियां चराने गए एक बुजुर्ग के घायल होने के बाद समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई, जिसके चलते परिजनों को उन्हें निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

 

जानकारी के अनुसार मोरी क्षेत्र के ढाटमीर गांव निवासी केदार सिंह बुधवार को भेड़-बकरियां चराने के लिए जंगल गए थे। इसी दौरान वे अचानक फिसलकर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह उन्हें निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी पहुंचाया।

 

अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन जब घायल को देहरादून ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस की मांग की गई तो चालक ने वाहन की जर्जर स्थिति का हवाला देते हुए जोखिम उठाने से इनकार कर दिया।

 

दो घंटे इंतजार के बाद निजी वाहन से ले जाना पड़ा पुरोला

 

बताया जा रहा है कि करीब दो घंटे तक एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी। मजबूरन परिजनों और ग्रामीणों ने घायल बुजुर्ग को निजी वाहन से मोरी से पुरोला की ओर रवाना किया। पुरोला डेरिका पहुंचने के बाद वहां से 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें उपचार के लिए देहरादून भेजा गया।

 

क्षेत्र में केवल एक एंबुलेंस, वह भी जर्जर

 

इस घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

पूर्व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष राजपाल रावत और पूर्व प्रधान ठाकुर सिंह रावत का कहना है कि मोरी, अडोर और बड़ासू पट्टियों जैसे बड़े और दूरस्थ क्षेत्र के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी में केवल एक ही 108 एंबुलेंस उपलब्ध है।

 

उनका कहना है कि पहाड़ी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह एंबुलेंस भी कई बार समय पर नहीं पहुंच पाती। इसके अलावा वाहन लंबे समय से जर्जर हालत में है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

ग्रामीणों ने उठाई अतिरिक्त एंबुलेंस की मांग

 

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मोरी ब्लॉक के कई गांव अभी भी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध न होने से मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मोरी क्षेत्र के लिए कम से कम एक अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए और 108 सेवा के जर्जर वाहनों को जल्द बदला जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।

 

मोरी, उत्तरकाशी | 07 मार्च 2026

रिपोर्ट – नीरज उत्तराखंडी

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