मुकेश कहते हैं कि उन्होंने बाकायदा अपनी जमीन पर बाउंड्री करके गेट लगा रखा है और गार्ड तैनात कर रखा था। लेकिन एक दिन गार्ड का फोन आया कि उनकी जमीन में गेट खोलकर बाकायदा कुछ लोग अंदर घुसे और उनकी जमीन का मुआयना किया। जाहिर है कि अधिकारियों को यह भली-भांति पता था कि यह जमीन किसी निजी व्यक्ति की है।
मुकेश कहते हैं कि उन्हें कुछ प्रॉपर्टी डीलरों और स्थानीय लोगों का भी फोन आया था कि आप की जमीन के पीछे कोस्ट गार्ड का भर्ती कार्यालय खुल रहा है और आप की जमीन में से 30 फुट बाय 300 फुट का रास्ता लिया जाएगा।
किसी ने नही सुनी
मुकेश ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई और 25 तारीख को जिलाधिकारी को मिले और उन्हें ज्ञापन दिया लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन के लोग तथा अधिकारी-कर्मचारी 26 तारीख को उनकी जमीन पर जबरदस्ती घुस गए और जेसीबी लेकर उनकी तार बाड़ तोड़ दी तथा उनकी सभी खेती तथा पौधे नष्ट कर दिए। इसके बाद 28 तारीख को वहां पर कोस्ट गार्ड भर्ती कार्यालय का शिलान्यास किया गया।
मुकेश कुमार दुखी होकर कहते हैं कि यदि सरकार को उनकी जमीन से रास्ता निकालना ही था तो कम से कम उनकी जमीन को अधिग्रहीत कर ले या फिर कुछ नहीं तो उन्हें कोई सूचना तो दे देती अथवा कोई आदेश तो देती।
मुकेश कुमार ने सरकार से दरख्वास्त की है कि कम से कम वह इस मामले में अपनी स्थिति को स्पष्ट करें। कहीं भी सुनवाई ना होने से मुकेश काफी परेशान हो गए हैं।
किसी भी तर्क से नही बच सकते सीएम
मुख्यमंत्री यह कहकर नहीं बच सकते कि अपनी ही विधानसभा में आम जनता के साथ हो रहे इस अन्याय का उन्हें कोई संज्ञान नहीं है। क्योंकि तमाम स्थानीय लोग, प्रॉपर्टी डीलर तथा शासन प्रशासन के अधिकारियों से इसकी आपत्ति दर्ज की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री को यह नहीं भूलना चाहिए कि महज दो ढाई साल बाद चुनाव लड़ने के लिए फिर से उन्हें इसी डोईवाला में इन्हीं आम लोगों से वोट मांगने भी जाना है। कोस्ट गार्ड भर्ती कार्यालय खोलने के नाम पर भले ही कितने ही करोड़ रुपए मिल जाएं लेकिन तरह का अपयश उन्हें ले डूबेगा।
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