वनाग्नि रोकथाम एवं लीसा विदोहन तथा चीड़ से आजीविका के लिए गढ़वाल डी.एफ.ओ एम. यादव ने की एक नई पहल

जयप्रकाश
पौड़ी गढ़वाल —– फायर सीजन में वनाग्नि के रोकथाम के लिए तथा चीड से आजीविका और लीसा विदोहन सम्बन्ध मे गढ़वाल रिजर्व फारेस्ट पौड़ी डी एफ ओ महातिम यादव ने एक नई पहल शुरू कि हैं। जिसमे लीसा विदोहन, एग्रो फॉरेस्ट्री व वन संरक्षण के माध्यम से आजीविका सुदृढ़ करने के लिए जन जागरूकता अभियान के तहत आम जन मानस को सुदृढ़ कर रही है
वन विभाग के तत्वावधान में मध्य हिमालयी क्षेत्र में चीड़ आधारित रोजगार की संभावनाओं विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन प्रेक्षागृह, पौड़ी में किया गया। कार्यशाला में लीसा विदोहन के माध्यम से रोजगार सृजन, ‘चीड़ एक कल्पवृक्ष’ विषय, मध्य हिमालयी क्षेत्र में चीड़ का सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा एग्रो फॉरेस्ट्री की संभावनाओं एवं चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष रचना बुटोला ने प्रतिभाग करते हुए दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मध्य हिमालयी क्षेत्र में चीड़ स्थानीय आजीविका और अर्थव्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण संसाधन है। वैज्ञानिक प्रबंधन एवं चीड़ आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

उन्होंने लीसा विदोहन, चीड़ आधारित उत्पादों तथा एग्रो फॉरेस्ट्री को ग्रामीण विकास के लिए उपयोगी बताते हुए स्थानीय युवाओं एवं महिला समूहों की सहभागिता पर बल दिया। साथ ही वन विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका संतुलित एवं उपयोगी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका भी सुदृढ़ हो सके।

डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने कहा कि मध्य हिमालयी क्षेत्र में चीड़ आजीविका और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है। लीसा विदोहन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा इसे वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ‘चीड़ एक कल्पवृक्ष’ की अवधारणा इसके बहुउपयोगी स्वरूप को दर्शाती है। एग्रो फॉरेस्ट्री के माध्यम से आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। साथ ही चीड़ की सूखी पत्तियों के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं पिरुल संग्रहण से वनाग्नि की घटनाओं को कम करने में भी सहायता मिलती है।

कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों एवं स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत रंगारंग, सुमधुर एवं प्रेरणादायक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा जन-जागरुकता के संदेश को प्रभावी रूप से लोगों तक पहुंचाया।

कार्यक्रम के माध्यम से लीसा विदोहन, वनाग्नि रोकथाम एवं वन संरक्षण के प्रति व्यापक जन-जागरूकता का संदेश दिया गया। विभिन्न नुक्कड़ नाटकों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जन सहभागिता और विभागीय समन्वय को बढ़ावा देते हुए वन संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया गया।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख पोखड़ा संजय गुसाईं, कनिष्ठ प्रमुख पोखड़ा संजय जोशी, जिला पंचायत सदस्य डोभ अनुज कुमार, जिला पंचायत सदस्य पोखड़ा बलवंत सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य कालों भारत सिंह रावत, एसडीओ आयशा बिष्ट, एसडीओ थैलींसैण गढ़वाल रिजर्व फॉरेस्ट लक्की शाह, प्रशिक्षु आईएफएस विनीत कुमार, रेंजर पौड़ी प्रभाग नक्षत्र लव शाह,रेंजर दिनेश नौटियाल सेवानिवृत्त डीन सोलन वि.वि. डॉ. कुलवंत शर्मा, सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, समूहों की महिलाएं एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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