सोना गिरा, चांदी लुढ़की, खरीदारों की लगी भीड़

वैश्विक और घरेलू कमोडिटी बाजारों में कीमती धातुओं पर लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा। निवेशकों का रुख सुरक्षित परिसंपत्तियों से हटकर अन्य विकल्पों की ओर झुकता दिखा, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।   वायदा बाजार […]

वैश्विक और घरेलू कमोडिटी बाजारों में कीमती धातुओं पर लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा। निवेशकों का रुख सुरक्षित परिसंपत्तियों से हटकर अन्य विकल्पों की ओर झुकता दिखा, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

 

वायदा बाजार में गिरावट

 

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.56 प्रतिशत फिसलकर 1,53,889 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं मार्च वायदा की चांदी में ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई और यह 1.18 प्रतिशत गिरकर 2,37,064 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी का रुख कायम रहा। हाजिर सोना 5,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसककर 4,992 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जिससे वैश्विक रुझान स्पष्ट रूप से दबाव में दिखा।

 

डॉलर की मजबूती बनी बड़ी वजह

 

डॉलर इंडेक्स 0.21 प्रतिशत चढ़कर 97.12 पर पहुंच गया। डॉलर में मजबूती आने से अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय मांग पर असर पड़ता है और कीमतों में नरमी देखने को मिलती है।

 

अमेरिकी आंकड़ों ने बढ़ाई दुविधा

 

जनवरी के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में अपेक्षा से कम बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि रोजगार से जुड़े आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे। इन मिश्रित संकेतों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों में कटौती करेगा या दरों को अधिक समय तक यथावत रखेगा। इसी अनिश्चितता ने कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है।

 

भू-राजनीतिक संकेतों का असर

 

ईरान की ओर से अमेरिका के साथ परमाणु समझौते की दिशा में सकारात्मक रुख के संकेत मिलने से वैश्विक तनाव में आंशिक कमी आई है। आमतौर पर युद्ध या अस्थिरता की आशंका में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन कूटनीतिक प्रगति की खबरों ने इसे सुरक्षित निवेश के तौर पर मिलने वाले समर्थन को कमजोर किया है।

 

अहम तकनीकी स्तर

 

विशेषज्ञों के मुताबिक MCX पर सोने के लिए 1,45,000 रुपये और 1,50,000 रुपये के स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में देखे जा रहे हैं। उछाल की स्थिति में 1,60,800 रुपये पर प्रतिरोध मिल सकता है।

 

चांदी के मामले में 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है, जिस पर बाजार की नजर रहेगी।

 

लंबी अवधि का नजरिया

 

भले ही फिलहाल कीमतों में दबाव दिख रहा हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और वैश्विक तरलता की स्थिति को देखते हुए दीर्घकाल में कीमती धातुओं का रुझान सकारात्मक रह सकता है।

 

बाजार अब पूरी तरह से फेडरल रिजर्व के आगामी फैसलों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर टिका हुआ है, जो आगे की दिशा तय करेंगे।

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