25 अप्रैल से घर-घर दस्तक, उत्तराखंड में मकान सूचीकरण का बड़ा अभियान शुरू, खाली घर ‘लॉक्ड’ श्रेणी में होंगे दर्ज
देहरादून, 27 फरवरी 2026।
उत्तराखंड में जनगणना 2027 की तैयारियां अब जमीनी स्तर पर उतरने जा रही हैं। पहले चरण के तहत 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में शासन की ओर से अधिसूचना जारी की जा चुकी है और जनगणना कार्य निदेशालय ने प्रशिक्षण एवं प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं।
इस प्रक्रिया से पहले 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक स्वगणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकें। अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे फील्ड में कार्य सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
30 हजार गणना ब्लॉक तैयार
राज्यभर में इस कार्य के लिए लगभग 30 हजार गणना ब्लॉक बनाए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक में अधिकतम 800 की जनसंख्या का मानक तय किया गया है। संबंधित विभागों से कर्मचारियों की सूची मांगी गई है, जिनमें से इन्यूमेरेटर्स की नियुक्ति कर उन्हें अलग-अलग ब्लॉक आवंटित किए जाएंगे।
इन्यूमेरेटर्स अपने-अपने क्षेत्रों का नक्शा तैयार करेंगे और मकान, दुकान, मंदिर, कुआं, ट्यूबवेल सहित सभी स्थायी संरचनाओं को चिह्नित करेंगे।
इसके बाद निर्धारित क्षेत्र में घर-घर जाकर 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी। जुटाए गए आंकड़े मौके पर ही जनगणना एप्लीकेशन पर अपलोड किए जाएंगे।
घोस्ट विलेज बनेंगे चुनौती
उत्तराखंड में लगातार हो रहे पलायन के कारण सैकड़ों गांव वीरान हो चुके हैं। ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 1792 गांव ‘घोस्ट विलेज’ की श्रेणी में हैं।
इनमें सर्वाधिक 331 गांव पौड़ी जिले में हैं। अल्मोड़ा में 105, चमोली में 76, बागेश्वर में 73 और हरिद्वार में 94 गांव ऐसे हैं, जहां आबादी न के बराबर या पूरी तरह शून्य हो चुकी है।
इन्हीं गांवों में जनगणना कार्य कराना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
लॉक्ड श्रेणी में दर्ज होंगे खाली मकान
जनगणना एप में विशेष प्रावधान किया गया है कि यदि किसी मकान पर लगातार ताला लगा मिले या वहां कोई जानकारी देने वाला उपलब्ध न हो, तो उसे ‘हाउस ऑफ यूज’ की श्रेणी में ‘वैकेंट’ सूची में शामिल करते हुए ‘लॉक्ड’ विकल्प दर्ज किया जाएगा।
यदि पूरे निर्धारित अवधि के दौरान किसी गांव में कोई भी निवासी नहीं मिलता है, तो उसकी जनसंख्या शून्य दर्ज की जाएगी। हालांकि ऐसे मकानों पर नंबरिंग की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी की जाएगी।
राजस्व ग्राम होने के कारण प्रक्रिया अनिवार्य
जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, घोस्ट विलेज भी राजस्व ग्राम हैं, इसलिए वहां भी अन्य क्षेत्रों की तरह ही सूचीकरण और गणना की कार्रवाई होगी। चार्ज ऑफिसर्स द्वारा नक्शे उपलब्ध कराए जाएंगे और सुपरवाइजर तथा इन्यूमेरेटर्स की तैनाती की जाएगी। यदि किसी गांव में कोई निवासी पाया जाता है, तो उसकी जनसंख्या का विवरण फरवरी 2027 में जनगणना के दूसरे चरण में दर्ज किया जाएगा।




