- Merchant QR Code बंद होने की आशंका से लाखों दुकानदार परेशान, व्यापारी संगठनों ने जागरूकता अभियान और शिविर लगाने की मांग की
देहरादून/नई दिल्ली। नीरज उत्तराखंडी
ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे देश के करीब 6 करोड़ छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों के सामने अब डिजिटल भुगतान से जुड़ा नया संकट खड़ा हो गया है। मर्चेंट क्यूआर कोड के लिए अनिवार्य किए गए KYC नियमों की 15 सितंबर की समयसीमा नजदीक आने के साथ ही छोटे कारोबारियों में असमंजस और चिंता बढ़ने लगी है।
डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में Merchant QR Code छोटे कारोबारियों के लिए कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ग्राहक बड़ी संख्या में नकद के बजाय UPI और QR कोड के जरिए भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में KYC प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर मर्चेंट QR कोड निष्क्रिय होने की आशंका से दुकानदारों को अपने रोजमर्रा के कारोबार पर सीधा असर पड़ने की चिंता सता रही है।
10 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों पर असर की आशंका
व्यापारी संगठनों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि समयसीमा तक KYC प्रक्रिया पूरी नहीं होने की स्थिति में 10 लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठान प्रभावित हो सकते हैं। QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं कर पाने से छोटे दुकानदारों की दैनिक बिक्री प्रभावित होने के साथ ही डिजिटल लेन-देन पर निर्भर ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जागरूकता और शिविर लगाने की मांग
व्यापारियों का कहना है कि KYC जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को लागू करने से पहले बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और संबंधित संस्थाओं को छोटे कारोबारियों के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए था। ग्रामीण और छोटे कस्बों के अनेक दुकानदारों को यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि उनकी KYC स्थिति क्या है और इसे पूरा कराने के लिए उन्हें किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।
व्यापारी संगठनों ने सरकार और RBI से मांग की है कि अंतिम तिथि से पहले जिला और तहसील स्तर पर विशेष KYC शिविर लगाए जाएं। साथ ही छोटे कारोबारियों को पर्याप्त समय दिया जाए और प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
कागजी औपचारिकताओं से बढ़ी परेशानी
छोटे व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए उन्हें QR कोड और UPI जैसी सुविधाओं से जोड़ा गया, लेकिन अब KYC प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण वही सुविधा उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है। बैंकों और पेमेंट कंपनियों से स्पष्ट और एक समान मार्गदर्शन नहीं मिलने से कई व्यापारी इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
व्यापारियों का तर्क है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियम जरूरी हैं, लेकिन नियमों के साथ जमीनी स्तर पर तैयारी, जागरूकता और सहायता भी उतनी ही जरूरी है। उनका कहना है कि किसी भी ऐसे कदम से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छोटे दुकानदारों को प्रक्रिया पूरी करने का पर्याप्त अवसर और आवश्यक सहायता मिले।


