नौगांव (उत्तरकाशी), 31 अगस्त 2026।नीरज उत्तराखंडी
गोडर पट्टी के 27 गांवों की लाइफ लाइन माने जाने वाले कंडारी मोटर मार्ग पर सारीगाड़ के समीप पिछले चार दिनों से आवाजाही पूरी तरह ठप है। मार्ग खोलने के लिए रविवार को राजमार्ग निर्माण खंड की दो पोकलेन मशीनें दिनभर जुटी रहीं, लेकिन ऊपर से लगातार दरक रही पहाड़ी के कारण मार्ग खोलने में सफलता नहीं मिल सकी। मार्ग बंद होने से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि सारीगाड़ के समीप यमुनोत्री हाईवे चौड़ीकरण के दौरान जुलाई माह में कंडारी मोटर मार्ग का एक हिस्सा धंस गया था। इसके बाद से मार्ग की स्थिति लगातार खराब बनी हुई है और अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। हल्की बारिश होने पर भी मार्ग कई दिनों तक बाधित हो रहा है।
नकदी फसल और दूध की आपूर्ति प्रभावित
कंडारी मोटर मार्ग बंद होने से क्षेत्र के काश्तकारों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीण अपनी नकदी फसलों को मंडियों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। वहीं, गांवों से दूध कलेक्शन सेंटर तक भी दूध नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रविवार को राजमार्ग निर्माण खंड की दो पोकलेन मशीनों ने दिनभर मलबा हटाकर मार्ग खोलने का प्रयास किया, लेकिन पहाड़ी से लगातार गिर रहे मलबे के कारण काम प्रभावित होता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि केवल मलबा हटाकर मार्ग खोलना स्थायी समाधान नहीं है।
स्थायी सुरक्षात्मक कार्य की मांग
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यमुनोत्री हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटी गई पहाड़ी के हिस्से में पर्याप्त सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए जाने के कारण भूस्खलन की समस्या बार-बार सामने आ रही है। जब तक प्रभावित हिस्से में सुरक्षा दीवार, नाली और अन्य आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए जाते, तब तक कंडारी मोटर मार्ग के बार-बार बंद होने का सिलसिला जारी रहेगा।
मार्ग बंद रहने से ग्रामीणों में आक्रोश भी बढ़ रहा है। लोगों ने स्थायी समाधान की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाने की चेतावनी दी है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश बहुगुणा, अर्जुन नौटियाल और सोबत राणा ने कहा कि कंडारी मोटर मार्ग क्षेत्र के 27 गांवों के लिए जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि मार्ग को अस्थायी रूप से खोलने के बजाय भूस्खलन प्रभावित हिस्से का स्थायी उपचार किया जाना चाहिए। यदि जल्द मार्ग सुचारु नहीं किया गया और सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं हुए तो क्षेत्रीय लोगों के साथ बैठक कर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।


