मोरी/उत्तरकाशी, 30 जुलाई 2026/नीरज उत्तराखंडी
- जान जोखिम में डालकर आवागमन; विभाग बोला—लकड़ी की पुलिया भी तेज बहाव में बही, स्थायी पुल का प्रस्ताव शासन को भेजा
मोरी विकासखंड के सांकरी-ओसला मोटर मार्ग पर घियागाड क्षेत्र की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। करीब एक माह पूर्व आई आपदा में पुल और सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद से ग्रामीणों को आज भी सुरक्षित आवाजाही का इंतजार है।
हालात ऐसे हैं कि महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और युवा बहते खड्ड पर पड़े एक पेड़ के तने के सहारे अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
यह मार्ग सुदूरवर्ती ढाटमीर, गंगाड पवाणी और ओसला गांवों की जीवनरेखा माना जाता है। प्रतिदिन लोगों को राशन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।
बरसात के मौसम में खड्ड का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण यह अस्थायी रास्ता किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। जरा-सी चूक सीधे उफनते पानी में गिरने का खतरा पैदा कर रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजपाल रावत का कहना है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है।
लकड़ी की पुलिया भी बह गई, स्थायी पुल का प्रस्ताव शासन को भेजा
#इस संबंध में साइड इंचार्ज अभियंता दिनेश नौटियाल ने बताया कि ग्रामीणों की वैकल्पिक आवाजाही के लिए हाल ही में घियागाड में लकड़ी की एक अस्थायी पुलिया बनाई गई थी, लेकिन खड्ड में जलस्तर अत्यधिक बढ़ने और तेज बहाव के कारण वह भी बह गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गाड़ का स्पान काफी अधिक है, जिससे अस्थायी व्यवस्था टिक नहीं पा रही है।
#उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उक्त स्थान पर स्थायी सेतु निर्माण के लिए विस्तृत प्राक्कलन (स्टीमेट) तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद ही स्थायी पुल का निर्माण संभव हो सकेगा और ग्रामीणों की वर्षों पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकेगा।
#फिलहाल घियागाड की तस्वीरें विकास और आपदा प्रबंधन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी पुल नहीं बनता, तब तक कम से कम ऐसी सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, जिससे किसी निर्दोष की जान जोखिम में न पड़े।







