केदारनाथ यात्रा से पहले गहराया कूड़ा संकट, व्यापारियों का फूटा आक्रोश

रुद्रप्रयाग, 1 मार्च 2026: आगामी 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले ही यात्रा मार्ग पर स्वच्छता व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। गौरीकुंड, सोनप्रयाग, सीतापुर, रामपुर, शेरसी और फाटा के व्यापारिक संगठनों ने जिला प्रशासन से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

 

व्यापार मंडलों का कहना है कि बाजार क्षेत्रों की सफाई के बाद एकत्रित कचरे को व्यवस्थित ढंग से निपटाने के बजाय नदी-नालों में डाला जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है, बल्कि विश्वप्रसिद्ध तीर्थ यात्रा की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनका दावा है कि इस विषय में प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान सामने नहीं आया।

 

प्रतिनिधियों के अनुसार यात्रा काल में कचरा उठाने के लिए केवल एक छोटा वाहन लगाया जाता है, जो बढ़ती मात्रा के सामने अपर्याप्त साबित हो रहा है। परिणामस्वरूप अधिकांश कूड़ा विभिन्न स्थानों पर ढेर के रूप में जमा रह जाता है।

 

यात्रा समाप्ति के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं दिखा। शीतकाल के दौरान फाटा बाजार के निकट वन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कचरा फैला मिला, जिससे भालू सहित अन्य वन्यजीव आबादी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रश्न उठाया कि जब अधिकांश होटल और लॉज बंद हैं, तब इतनी मात्रा में अपशिष्ट वहां तक कैसे पहुंच रहा है। उन्होंने जंगलों में फैले कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटान की मांग की है।

 

शेरसी के होटल व्यवसायी अशोक सेमवाल ने बताया कि पिछले वर्ष बाजार के एक सिरे पर अस्थायी डंपिंग स्थल बनाया गया था, जहां शेरसी-बड़ासू सहित अन्य क्षेत्रों का कचरा डाला गया। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद यात्रा समाप्ति के बाद भी वहां जमा अपशिष्ट का निस्तारण नहीं किया गया, जिससे कूड़े के ढेर पर भालू आने लगे। स्थिति बिगड़ने पर ग्रामीणों को कूड़े में आग लगानी पड़ी।

 

फाटा के होटल कारोबारी सुनील सेमवाल ने जानकारी दी कि यात्रा सीजन में जिला पंचायत के सफाई कर्मचारी कचरा एकत्र कर वाहन से अन्य स्थान पर ले जाते हैं, किंतु कई बार वाहन समय पर न पहुंचने के कारण कूड़ा जंगलों और नालों में फेंक दिया जाता है। यही स्थिति वन्यजीवों को बस्तियों की ओर खींच रही है।

 

व्यापारियों और ग्रामीणों ने मांग रखी है कि प्रत्येक यात्रा पड़ाव पर स्थायी कूड़ा संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएं, नियमित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित हो तथा अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाए, ताकि यात्रा प्रारंभ होने से पहले स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ हो और श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सके।

 

इस संबंध में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि यात्रा मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखने हेतु संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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