ओह ! माया और अन्य शहीदों ! तुम सिपाही की मौत क्यों मरे ! ओवरलोड गाड़ी या अवैध शराब से क्यो नही !!

कमल जगाती, नैनीताल राज्यपाल की सुरक्षा व्यवस्था में लगी गाड़ी हादसे में दिवंगत हुए नंदन सिंह बिष्ट, ललित और अब एस.आई.माया बिष्ट की मौत प्रदेश सरकार की लचर कार्यप्रणाली पर कई सवाल छोड़ गई है। माया के आज सवेरे निधन के बाद उनको रानीबाग में पुलिस सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सरकार की […]

कमल जगाती, नैनीताल

राज्यपाल की सुरक्षा व्यवस्था में लगी गाड़ी हादसे में दिवंगत हुए नंदन सिंह बिष्ट, ललित और अब एस.आई.माया बिष्ट की मौत प्रदेश सरकार की लचर कार्यप्रणाली पर कई सवाल छोड़ गई है। माया के आज सवेरे निधन के बाद उनको रानीबाग में पुलिस सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सरकार की बेरुखी से पुलिस महकमे में नाराजगी पनप रही है। सांसद ने मुख्यमंत्री से वार्ता कर लाभ दिलाने का प्रयास करने का भरोसा दिलाया है।


नैनीताल के दुर्गापुर में बीती 22 अक्टूबर को एक स्कूल के कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल की फ्लीट के लिए रास्ता साफ करने के लिए एक पुलिस वाहन(बोलेरो) जुटा था। इंश्योरेंस विहीन वाहन में चार लोग सवार थे, जो अचानक एक मोड़ पर अनियंत्रित होकर 30 फ़ीट गहरी खाई में जा गिरा। वाहन उल्टा होकर नीचे सड़क में जा गिरा, जिससे चालक नंदन सिंह बिष्ट और आरक्षी ललित के साथ महिला एस.आई.माया बिष्ट गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में गाड़ी में मौजूद थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत भी घायल हो गए थे। घायलों को तत्काल हल्द्वानी अस्पताल पहुंचाया गया जहां नंदन और ललित की कुछ समय में ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल एस.आई.माया बिष्ट ने भी आज ड्यूटी करते हुए अपने प्राण त्याग दिए हैं।

पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने एक पोस्ट में लिखा है कि दिवंगत पुलिस कर्मियों के लिए पूरा पुलिस महकमा संवेदनशील है और अपने स्तर से परिवार वालों के लिए आर्थिक मदद जुटा रहा है।

उन्होंने लिखा है कि पुलिस मुख्यालय में स्वेच्छा से धनराशि जमा की जा रही है। उन्होंने ये भी लिखा है कि वीरगति को प्राप्त पुलिस कर्मियों के परिजनों को पेंशन और नौकरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस महकमे में ही कार्यरत एक अधिकारी ने सोशियल मीडिया में लिखा है कि वी.आई.पी.ड्यूटी में लगे पुलिस कर्मियों की मौत से दुखी समस्त पुलिस परिवार ने पीड़ितों की मदद के लिए अंशदान शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार और विभागीय व्यवस्थाओं से अलग, वो लोग पीड़ित परिवारों की मदद में जुटे हैं।


इधर स्थानीय सांसद अजय भट्ट ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वो इस मामले में मुख्यमंत्री से बात कर पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद, पेंशन और नौकरी दिलाने के प्रोविजनों पर वार्ता करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि क्षेत्र में लौटने के बाद वो पीड़ित परिवारों से मिलने की कोशिश करेंगे।

इस पूरे एपिसोड में एक अहम रोल भतरौज खान के थाना अध्यक्ष नीरज भाकुनी का भी रहा। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों की सहायता के लिए अपने सहयोगियों से मदद करने की अपील की।

उनकी इस अपील पर हजारों रुपए इकट्ठे भी हुए। लेकिन एक-दो दिन में ही श्री भाकुनी को एक स्पष्टीकरण देते हुए यह अपील हटानी पड़ गई। संभवत उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ऐसा हुआ या फिर इस अपील पर लोग काफी भावुक हो गए थे कि सरकार को संवेदनहीनता दिखाने के लिए कोसने लग गए थे।

मामला जो भी हो, इस तरह की अपीलों का यह असर जरूर हुआ कि अपनी इज्जत बचाने के लिए ही सही लेकिन  पुलिस महकमा और सरकार ने थोड़ी और अधिक संवेदनशीलता  दिखाने की कोशिश की।

पुलिस महकमें और सरकार का कहना है कि शहीद पुलिसकर्मियों के प्रति संवेदनशील है और ऐसी परिस्थितियों में मदद किए जाने के अपने मानक हैं। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या यह संवेदनशीलता पहले नहीं दिखाई जानी चाहिए थी ! और जब सरकार अवैध शराब पीकर मरने वालों और नियम विरुद्ध ओवरलोडिंग गाड़ी में एक्सीडेंट के कारण मरने वालों के प्रति मानक भूल जाती है तो क्या इसमें मानकों को थोड़ा दरकिनार नहीं रखा जा सकता था !

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