ऑपरेशन ‘कालनेमि’: धार्मिक भेष में ठगी करने वालों पर सीएम धामी का धाकड़ एक्शन।अब नहीं चलेगा पाखंड..

देहरादून, जुलाई 2025:
देवभूमि उत्तराखंड में आस्था के नाम पर हो रही ठगी और पाखंड पर अब सरकार का कड़ा रुख सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशभर में फर्जी साधु-संतों, ढोंगियों और धार्मिक चोला ओढ़कर लोगों को भ्रमित करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ ‘ऑपरेशन कालनेमि’ शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है ऑपरेशन ‘कालनेमि’?

मुख्यमंत्री ने त्रेता युग के असुर कालनेमि का उदाहरण देते हुए कहा,

“जैसे उस युग में असुर साधु का भेष धरकर लोगों को भ्रमित करता था, आज भी कई कालनेमि समाज में सक्रिय हैं। अब ऐसे ढोंगियों को उजागर कर उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

कांवड़ यात्रा से ठीक पहले शुरू किए गए इस अभियान का मकसद उन फर्जी बाबाओं, साधुओं और भेषधारियों की पहचान कर उन्हें जेल भेजना है जो धर्म के नाम पर लोगों को ठगते हैं, विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाते हैं।

कांवड़ यात्रा से पहले बड़ा फैसला

उत्तराखंड में हर साल श्रावण मास में करोड़ों शिवभक्तों की भीड़ हरिद्वार, ऋषिकेश व पहाड़ी क्षेत्रों में उमड़ती है। ऐसे में कई असामाजिक तत्व धार्मिक भेष में आकर लोगों को गुमराह करते हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और सुरक्षा व्यवस्था भी खतरे में पड़ती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि ऐसे लोगों की पहचान कर:

  • कड़ी निगरानी रखी जाए।
  • पुख्ता प्रमाणों के साथ गिरफ्तारी की जाए।
  • फर्जी साधु-संतों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कानूनी कार्रवाई की जाए।

धर्म और सुरक्षा दोनों की रक्षा का संकल्प

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार आस्था और सुरक्षा दोनों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने दो टूक कहा:

“किसी भी धर्म, पंथ या समुदाय से जुड़ा व्यक्ति यदि धार्मिक वेशभूषा का दुरुपयोग करता है तो उस पर कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई होगी।”

धर्म के नाम पर पाखंड नहीं सहा जाएगा

“ऑपरेशन कालनेमि” केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड सरकार का धर्म और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के प्रति संकल्प भी है। यह उन श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करता है जो देवभूमि में ईमानदारी और आस्था के साथ आते हैं।

मुख्यमंत्री की धर्मरक्षक छवि और मजबूत

हालिया निर्णय से एक बार फिर पुष्कर सिंह धामी की धर्मरक्षक और निर्णायक नेतृत्वकर्ता की छवि और मजबूत हुई है। वे न केवल सुशासन के प्रतीक बनकर उभरे हैं, बल्कि एक ऐसे नेता भी साबित हुए हैं जो सनातन संस्कृति की मर्यादा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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