रवाईं घाटी आये 90 कश्मीरियों की हुई घर वापसी

नीरज उत्तराखंडी/पुरोला

बीते डेढ़ माह से कोरोना वैश्विक महामारी की मार झेल रहे लाकडाउन से अपने डेरों में कैद कश्मीरी 90 मजदूरों की घर वापसी की खबर पर इस कदर खुश थे कि रवानगी होने पर उपजिलाधिकारी आईएएस मनीष कुमार का आभार जताते हुए जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। रविवार को कश्मीर घाटी के 90 व यूपी के 8 मजदूरों की घर वापसी हुई।
प्रशासन ने शनिवार को जब पुरोला व मोरी समेत क्षेत्र के टौंस व अपर यमुना वन प्रभाग के वनों में विभाग के माध्यम से लकडी चिराग कटान के काम पर लगे कश्मीरी मजदूरों को जब घरों को लौटेने की सूचना दी तो मजदूरों के चेहरे में खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। घर लौटने को इतने उत्सुक थे कि प्रशासन का धन्यवाद कर एसडीएम मनीष कुमार जिंदाबाद के नारे लगा उनको दुवाएं देने लगे।
बताते चलें कि रवांई घाटी में यूपी,विहार समेत कश्मीर घाटी के कठुआ, डोडा, अनंतनाग, बारमूला के सैकड़ों कश्मीरी मजदूर सड़क डामरीकरण, भवन निमार्ण कार्य व जंगलों में विभाग के माध्यम से लकडी चिरान-कटान का काम करते हैं। जो कोरोना वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन में काम न मिलने से बेरोजगार हो गए व लंबे समय से रोजी रोटी की चिंता से परेशान होकर अब अपने घरों के जाने के लिए जुग्गत मे लगे थे। परेशान मजदूर डेढ़ माह से घर वापसी को बेताब थे, जिस पर शनिवार को प्रशासन ने इनको घर भेजने की व्यवस्था की और रविवार को रोहडू-हिमाचल के रास्ते से कठूवा तक कश्मीर को भेजा तो मजदूरों में खुशी का माहौल था।


कश्मीर घाटी के मजदूरों निशार अहमद, गुलामनवी, रमजान, मंजूर अहमद, अमतियाज, सरीद खान, मोहम्मद सफी आदि ने बताया कि जंगलों में चिरान का काम करते हैं। काम बंद पड़े होने से रोजी रोटी की समस्या आ गई व अब घर पँहुचने के सिवाय कोई रास्ता नही है। ऐसी परिस्थिति में परिवार के साथ ही रहने में खैरियत है।
उन्होंने कहा कि यंहा के प्रशासन ने हम लोगों की खाने, रहने व घर जाने की मदद व व्यवस्था की जिससे हमें बेहद खुशी है।
उपजिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि पुरोला, मोरी व अपर यमुना क्षेत्र में चिरान का कार्य करनें वाले कश्मीर के 90 मजदूरों दो बसों से हिमाचल के रास्ते कठूवा तक भेजा गया है, जबकि यूपी के डामरीकरण करनें वाले आठ मजदूरों को दो छोटी गाडियों से भेजा गया है। वही अभी बिहार के बहुत सारे मजदूर है, जिनका घर वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जैसे ही व्यवस्था बनती है, उन्हें भी भेजने की कार्यवाही की जाएगी।

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