दुर्गम स्कूल खाली, शहर में ‘अटैचमेंट’ का जाल! चमोली के 20 शिक्षक-कर्मचारी सालों से देहरादून-पौड़ी में तैनात

उत्तराखंड के चमोली जिले में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के कई स्कूल शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं, जबकि करीब 20 शिक्षक और कर्मचारी वर्षों से अटैचमेंट के सहारे देहरादून और पौड़ी में ड्यूटी कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनका वेतन अभी भी चमोली जिले के दुर्गम क्षेत्रों में स्थित मूल तैनाती वाले विद्यालयों से जारी हो रहा है।

 

चमोली जिले में कुल 908 प्राथमिक विद्यालय, 195 जूनियर हाईस्कूल और 206 माध्यमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद शिक्षकों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि कई स्कूल केवल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।

 

ब्लॉकवार स्थिति पर नजर डालें तो कर्णप्रयाग में 25, पोखरी में 31, नंदानगर में 46, गैरसैंण में 60, जोशीमठ में 57, दशोली में 43, नारायणबगड़ में 38 और देवाल में 40 विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं।

 

इधर कई शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से अटैचमेंट पर तैनात हैं। वरिष्ठ सहायक आलोक उनियाल को 23 जनवरी 2023 से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय देहरादून में अटैच किया गया है, जबकि उनकी मूल तैनाती बीईओ कार्यालय देवाल में है। इसी तरह जीआईसी रोहिड़ा, गैरसैंण के शिक्षक हिमांशु रावत वर्ष 2022 से राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा देहरादून में अटैच हैं, जबकि उनकी मूल तैनाती जीआईसी रोहिड़ा में है।

 

जीआईसी मैहलचोंरी, गैरसैंण के शिक्षक सूर्यकांत ममगाई वर्ष 2021 से एससीईआरटी देहरादून में कार्यरत हैं। वहीं जीआईसी हरगड़, गैरसैंण के कर्मचारी आशीष कुमार को वर्ष 2020 से अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल, पौड़ी में अटैच किया गया है।

 

इसी तरह शंकर सिंह रावत वर्ष 2023 से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय देहरादून के पुस्तकालय प्रकोष्ठ में अटैच हैं, जबकि उनका मूल विद्यालय राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरकंडे, गैरसैंण है।

 

जानकारी के अनुसार, ऐसे कुल 20 शिक्षक-कर्मचारी देहरादून और सुगम क्षेत्रों के कार्यालयों व विद्यालयों में अटैच हैं, जबकि उनका वेतन चमोली और पौड़ी जिलों से जारी किया जा रहा है।

 

राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी का कहना है कि शिक्षा विभाग में हर स्तर पर अटैचमेंट की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। उनके मुताबिक शिक्षक और कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालयों में ही तैनात किया जाना जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक अटैचमेंट के कारण कई लोग सुगम क्षेत्रों में बने रहते हैं और दुर्गम क्षेत्रों के स्कूल खाली रह जाते हैं।

 

वहीं प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली धर्म सिंह का कहना है कि कर्मचारियों का अटैचमेंट राज्य स्तर से किया गया है और जरूरत के आधार पर यह व्यवस्था लागू होती है। हालांकि शिक्षकों के अटैचमेंट को व्यवस्थित करने में विभाग को कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

 

जिले में पहले से ही शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में अटैचमेंट की यह व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा रही है और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।

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