एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के पीजी शोधार्थियों की राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि

देहरादून। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (SGRR) के पीजी माइक्रोबायोलॉजी के शोधार्थियों ने अपने उत्कृष्ट शोध कार्यों से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। संस्थान के छात्र डॉ. नताशा बडेजा और डॉ. सौरभ नेगी, अपने मेंटर्स डॉ. डिंपल रैणा और डॉ. ईवा चंदोला के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं।

इनकी उपलब्धि पर एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज और श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने उन्हें आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी हैं।

आईसीएमआर स्कॉलरशिप में चयन

डॉ. नताशा बडेजा और डॉ. सौरभ नेगी को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है। डॉ. डिंपल रैणा के अनुसार, यह स्कॉलरशिप पूरे देश में केवल 120 पीजी डॉक्टरों को दी जाती है, जो इनकी कड़ी मेहनत और उत्कृष्ट शोध का प्रमाण है।

डॉ. नताशा का शोध: एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर अध्ययन

डॉ. नताशा “इवेल्यूएशन ऑफ कॉलिस्टिन रेजिस्टेंस एंड डिटेक्शन ऑफ MCR-1 जीन इन मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट ग्राम-नेगेटिव क्लिनिकल आइसोलेट्स एट टर्शरी केयर हॉस्पिटल इन उत्तराखंड” विषय पर शोध कर रही हैं।

शोध का महत्व

  • लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स के अनियंत्रित उपयोग से बैक्टीरिया प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे दवाएं असर नहीं करतीं।
  • आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के इलाज के लिए अब कुछ ही एंटीबायोटिक्स बची हैं, लेकिन उन पर भी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है।
  • यह शोध डॉक्टरों और रोगियों के लिए नई उम्मीद जगाएगा, क्योंकि यह बताएगा कि कॉलिस्टिन और अन्य हाई-लेवल एंटीबायोटिक्स कितनी प्रभावी हैं

डॉ. सौरभ नेगी का शोध: टीबी पर नया दृष्टिकोण

डॉ. सौरभ का शोध “मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (टीबी)” पर केंद्रित है और यह डॉ. ईवा चंदोला के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

शोध की अहमियत

  • शोध का उद्देश्य टीबी रोगाणु के उन जीन की पहचान करना है, जो दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर उन्हें बेअसर बना देते हैं।
  • इस शोध के नतीजे भविष्य में डॉक्टरों को सही उपचार चुनने में मदद करेंगे, जिससे टीबी जैसी गंभीर बीमारी से निपटने में नई रणनीतियां बन सकेंगी

एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के ये शोध स्वास्थ्य जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इनके नतीजे चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इन उपलब्धियों ने उत्तराखंड के मेडिकल क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।

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