खुलासा : जुगाड़ बाज यात्री, लापरवाह प्रशासन। सीमाओं पर कोरोना टेस्टिंग व्यवस्था ध्वस्त।

देहरादून, विजेंद्र राणा
आशारोड़ी चैक पोस्ट पर नही है स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद,

देहरादून आने वाले किसी भी यात्री का नही हो रहा टेस्ट,

पुलिस यात्रियों की डिटेल नोट करने के बाद जाने दे रही आगे,

न सरकार न निजी, किसी लैब के कर्मचारी नही मौजूद,

नियमो ओर आदेशों की उड़ रही धज्जियां,

दिन प्रतिदिन कोरोना मरीजों की बढ़ती हुई संख्या सरकार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है! परंतु इस समस्या के लिए आम नागरिक उतना ही जिम्मेदार है, जितना हमारा लाचार प्रशासन !

प्रदेश की सीमाओं की बात की जाए तो डाट काली मंदिर पुरानी टनल  पर चेक पोस्ट तो लगे हैं परंतु फिर भी यहां प्रवेश करने वाले यात्री बिना कोरोना टेस्ट कराए हुए प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं!

टनल पर विक्रम एवं ऑटो का बड़ा जमघट आपको देख सकता है! जो प्रवासियों को बिना को बिना टेस्ट करवाएं उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर आ रहे हैं!

यह प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है! देहरादून में आने वाली अधिकांश प्रवासी बिना करो ना टेस्ट करवाए प्रदेश की सीमा के अंदर प्रवेश कर रहे हैं और आशा रूडी चेक पोस्ट पर भी ऐसी ही घटनाएं देखने को मिल रही है !जिससे प्रदेश मैं कोरोना मरीजों का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है! यूपी रोडवेज की कुछ बसें दिल्ली से एवं अन्य गाजियाबाद में मेरठ मुजफ्फरनगर से होकर आ रही है।

औसतन यूपी रोडवेज की 20 बसें प्रति बस 25 सवारी लेकर राज्य की सीमा में प्रवेश कर रही है!

सूत्र बता रहे हैं कि लगभग 1000 से 1500 यात्री प्रतिदिन राज्य की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं और इतने ही यात्रि औसतन उत्तराखंड से अन्य राज्यों की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं !

प्रवासी चेक पोस्ट पर कोरोना की जांच से बचने के लिए ऑटो या विक्रम से उतरकर कुछ मिनट पैदल चलकर चेक पोस्ट को पैदल पार कर रहे हैं, एवं जैसे ही चेक पोस्ट खत्म हो जाता है यह यात्री पुनः उसी गाड़ी मे सवार हो जाते हैं !

कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रवासियों ने कोरोना की तोड़ खोज ली है! जिससे प्रवासी बिना कोरोना की जांच करवाए प्रदेश की सीमा में दाखिल हो जाते हैं!

परंतु समस्या यहीं खत्म नहीं हो जाती है करोना मैं आम नागरिक कोरोना एक पहेली बन गया है ! ऑटो एवं विक्रम वाले सामान्य दर से लगभग 2 गुना किराया यात्रियों से वसूल कर रहे हैं और मजबूर होकर यात्री यह किराया वहन कर रहा है! जिसकी भनक प्रशासन को होने के बावजूद भी इनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं हो रही है!

कुल मिलाकर स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। यदि इसी गति से यह प्रवासी सीमा में प्रवेश होते रहें तो प्रदेश में करो ना का ग्राफ कहां तक पहुंच जाएगा इसका अनुमान लगाना बहुत कठिन है। यदि समय रहते हुए प्रशासन नहीं जागा तो आने वाले कुछ दिनों में स्थितियां और बिगड़ सकती हैं!

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