एक्सक्लूसिव : कोरोना में क्वारंटीन का चक्रव्यूह !

कोरोना में क्वारंटीन का चक्रव्यूह 
अब डीजी हेल्थ की कोरोना बुलेटिन में क्वारंटीन लोगों का डाटा नदारद ,
चार दिन से बुलेटिन में सरकारी क्वारंटीन केंद्रों में रह रहे संभावित संक्रमितों की जानकारी नहीं, यह लोग कोरोना आपदा कानून के तहत रोके जाते हैं।
– भूपत सिंह बिष्ट

विगत 21 जून से रोजाना जारी हो रही कोरोना बुलेटिन में सहसा क्वारंटीन किए जा रहे नागरिकों की जानकारी देना रोक दिया गया है। उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी आपदा के कारण भारत सरकार ने एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश या एक जनपद से दूसरे जनपद में जाने पर कोरोना संक्रमण रोकने के लिए फेसिलिटी क्वारंटीन केंद्र बनाये हैं। इन केंद्रों में रहने , खाने और स्वास्थ्य सुविधाओं को सरकारी खर्च पर मुहैया कराया जाता है।
क्वारंटीन केंद्रों में रेड जोन या कंटेनमेंट जोन से आने वाले यात्रियों को सरकारी नियमों के अनुसार 7 दिन से लेकर 14 दिन तक रोका जाता है।

क्वारंटीन सेंटर पर एक नजर

कोरोना के लक्षण होने पर या कोरोना की संभावना जांचने के लिए क्वारंटीन केंद्रों से कोरोना सैंपल भी उठाये जाते हैं। कोरोना को लेकर सरकार का बड़ा बजट इन क्वारंटीन केंद्रों की सुरक्षा, रहन – सहन, खाने पीने व स्वास्थ्य सुविधाओं को जुटाने में खर्च किया जा रहा है।
20 जून की कोरोना बुलेटिन में क्वारंटीन किए गए लोगों की संख्या 10343 रिकार्ड की गयी है। जबकि 1 जून को क्वारंटीन किए गए लोगों का संख्या 36005 बतायी गयी है। इस माह जून माह में सरकारी क्वारंटीन केंद्र में सबसे कम लोग 15 जून को 9485 बताये गए हैं।

सेंटर मे भर्ती का ब्यौरा

फिलहाल कोरोना बुलेटिन में जारी की क्वारंटीन लोगों की औसत प्रतिदिन संख्या 17633 से अधिक है और इस में पिछले चार दिन के क्वारंटीन लोगों की संख्या नहीं जोड़ी जा सकी है।
डीजी हेल्थ द्वारा जारी की जा रही पहली कोरोना बुलेटिन 15 मार्च 2020 को जारी की गई – जब कोरोना का पहला पोजिटिव मामला आ गया। इस बुलेटिन में चीन और कोरोना प्रभावित देशों से आने वाले नागरिकों का विवरण और 28 दिन तक निरीक्षण में रखे गए लोगों की जानकारी दी गई।
पहली बुलेटिन में हास्पीटल आइशोलेसन में 7, सरकारी क्वारंटीन केंद्र में 6 और घरों में क्वारंटीन 188 यानि कुल 201 लोगों का विवरण दिया गया है। तब हास्पीटल में आइशोलेसन बैड 337 व क्वारंटीन बैड 801 बताये गए हैं। 24 मार्च को 21 दिन के लिए लाकडाउन का पहला चरण कोरोना को हराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने घोषित किया था।
25 मार्च की बुलेटिन में हास्पीटल बेड की संख्या 933 व क्वारंटीन बैड की संख्या 1384 हो गई । इस के बाद हास्पीटल और क्वारंटीन केंद्रों में उपलब्ध बैड की जानकारी देना बुलेटिन में बंद कर दिया गया है। 25 मार्च को सरकारी और होम क्वारंटीन का मिला जुला आंकड़ा 1462 बताया गया है। 31 मार्च और 1 अप्रैल को फिर होम ओर सरकारी क्वारंटीन का मिला जुला आंकड़ा 9650 बताया गया।
20 अप्रैल की बुलेटिन में हास्पीटल आइशोलेसन 567, सरकारी क्वारंटीन 2002 व होम क्वारंटीन 63902 की संख्या जारी की गई है। 46 कोरोना पोजिटिव में 18 ठीक हो चुके थे। 30 अप्रैल की बुलेटिन में सरकारी क्वारंटीन में 2221 और होम क्वारंटीन 15470 बताये गए हैं।
10 मई की बुलेटिन में फेसलिटी क्वारंटीन या सरकारी केंद्र में 2514 व होम क्वारंटीन में 14624 लोगों की संख्या बतायी गयी। 20 मई की बुलेटिन में होम क्वारंटीन का आंकड़ा बंद हो गया और सरकारी क्वारंटीन सुविधा केंद्र में 5652 नागरिकों को होना बताया गया।
21 मई को क्वारंटीन की संख्या घटकर 4157 रह गयी लेकिन 22 मई से अचानक क्वारंटीन लोगों की सरकारी क्वारंटीन में बढ़कर 13170 हो गई। 28 मई को सरकारी फेसिलिटी क्वारंटीन का आंकड़ा 19939 का रहा है लेकिन 29 मई को यह संख्या बढ़कर 33650 हो गई।

जानना जरूरी क्यों 

अब यह जानना जरूरी है कि सरकारी क्वारंटीन केंद्रों में इतनी बड़ी संख्या में बेड, रहन – सहन, खाना पीना और स्वास्थ्य का जिम्मा उठाना निसंदेह कोरोना वारियर का ही काम हो सकता है। इस बुलेटिन में अभी तक जनपद वार सरकारी क्वारंटीन केंद्रों की क्षमता और रह रहे लोगों की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
फिर 29 व 30 मई की बुलेटिन में क्वारंटीन का आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

एक जून को सरकारी क्वारंटीन आंकड़ा 36005 का है। 2 जून केा 29408 व 3 जून को 33789 पहुंच गया। 6 जून को 8189 घट कर 25265 12 जून को 15102, 13 जून को घटकर 9996 व 15 जून को 9485 बताया गया है।
जाहिर है कि सरकारी फेसिलिटी क्वारंटीन केंद्रों में हजारों की संख्या में रखे गए क्वारंटीन लोगों ने ढेर सारी असुविधायें झेली हैं। कई केंद्रों में क्वारंटीन लोगों के मौत की खबर ने भी सब को दुखी किया है।
क्वारंटीन किए गए लोगों को कोरोना बुलेटिन में शामिल न करना घोर लापरवाही है। कोरोना का दंश क्वारंटीन किए गए लोगों को भी सबसे ज्यादा झेलना पड़ रहा है। सरकार को विभिन्न जनपदों में उपलब्ध क्वारंटीन केंद्र और हास्पीटल के बेड की जानकारी कोरोना आपदाकाल में सार्वजनिक रखना आवश्यक है।

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