क्राइम: मामूली कहासुनी में दिनदहाड़े चाचा की कुल्हाड़ी से हत्या,आरोपी भतीजा फरार

मोरी (उत्तरकाशी), 8 सितंबर। नीरज उत्तराखंडी  मोरी विकासखंड के फतेपर्वत क्षेत्र के सुदूरवर्ती बरी गांव में सोमवार को मामूली कहासुनी के बाद एक युवक ने अपने रिश्ते के चाचा पर कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। दिनदहाड़े हुई इस घटना से क्षेत्र में सनसनी […]

मोरी (उत्तरकाशी), 8 सितंबर। नीरज उत्तराखंडी 

मोरी विकासखंड के फतेपर्वत क्षेत्र के सुदूरवर्ती बरी गांव में सोमवार को मामूली कहासुनी के बाद एक युवक ने अपने रिश्ते के चाचा पर कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। दिनदहाड़े हुई इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

जानकारी के अनुसार, बरी गांव निवासी करम चंद उर्फ गांधी सोमवार सुबह करीब 11 बजे अपनी बोलेरो वाहन लेकर मोरी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान दांता धार तोक के पास उनकी रिश्ते के भतीजे सुमन चंद्र से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई।

देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और सुमन चंद्र ने करम चंद पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में उनके हाथ और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार आरोपी युवक को झगड़ालू प्रवृत्ति का बताया जा रहा है।

पुलिस उपाधीक्षक चंचल शर्मा ने बताया कि घटनास्थल राजस्व पुलिस क्षेत्र में आता है। राजस्व पुलिस के बहिष्कार के चलते मोरी थाने से थानाध्यक्ष दीपक रावत के नेतृत्व में पुलिस टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया है।

क्षेत्र में दूरसंचार सुविधा नहीं होने के कारण पुलिस को भी मौके तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

कमजोर पड़ती सामाजिक संवेदनशीलता पर सवाल

मोरी की यह घटना केवल एक हत्या की वारदात नहीं, बल्कि पहाड़ के बदलते सामाजिक परिवेश पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। कभी पहाड़ की पहचान उसकी शांत वादियों, सरल जीवन और आपसी भाईचारे से होती थी। गांवों में रिश्ते केवल खून के रिश्ते नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार, संवेदना और आपसी विश्वास के मजबूत बंधन माने जाते थे।

विशेषकर चाचा-भतीजे का रिश्ता पहाड़ी समाज में अपनत्व और स्नेह का प्रतीक रहा है। परिवारों में मतभेद और नाराजगी होना सामान्य बात थी, लेकिन सामाजिक लोकलाज और रिश्तों की मर्यादा अक्सर विवादों को हिंसा में बदलने से रोकती थी।

आज बदलते सामाजिक परिवेश में गुस्सा, आवेश और असहिष्णुता जिस तरह रिश्तों पर भारी पड़ रही है, वह चिंता का विषय है। मामूली कहासुनी में रिश्ते की मर्यादा भूलकर हत्या तक पहुंच जाना इस बात की गंभीर चेतावनी है कि पहाड़ की पारंपरिक सामाजिक संवेदनशीलता और आपसी भाईचारे को बचाने की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

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