टॉप-5 में उत्तराखंड, कारोबार के मोर्चे पर बना सुधारों का मॉडल

देहरादून। उत्तराखंड ने निवेश और उद्योग को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा मुकाम हासिल किया है। अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिल अनुमतियों को कम करने के लिए चलाए गए ‘डी-रेगुलेशन 1.0 कंप्लायंस रिडक्शन’ अभियान के तहत राज्य को देशभर में पांचवां स्थान मिला है। यह उपलब्धि प्रशासनिक सुधारों और तेज़ निर्णय प्रक्रिया का परिणाम मानी जा रही है।

 

सोमवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र सरकार की टास्क फोर्स की अध्यक्ष और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के दूसरे चरण की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में राज्य द्वारा उद्योगों के लिए प्रक्रियाएं सरल बनाने, अनुमति प्रणाली को पारदर्शी करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की गई।

 

फेज-2 में तय हुईं नौ अहम प्राथमिकताएं

 

दूसरे चरण के अंतर्गत राज्य के लिए नौ प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस तय किया गया है। इनमें भूमि उपयोग नीति में स्पष्टता, भवन निर्माण और विकास परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो तंत्र, पर्यावरणीय संतुलन के साथ पर्यटन क्षेत्र में नवाचार जैसे बिंदु शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना और सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाना है।

 

टास्क फोर्स की अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि औद्योगिक प्रस्तावों को निर्धारित समय सीमा में स्वीकृति दी जाए। साथ ही सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन व्यवस्था लागू कर छोटे निवेशकों को राहत प्रदान की जाए।

 

सिंगल विंडो सिस्टम होगा और प्रभावी

 

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने हेतु सिंगल विंडो प्रणाली को और सशक्त किया जा रहा है। भवन निर्माण अनुमति, विद्युत कनेक्शन, श्रम विभाग, अग्निशमन, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। सभी विभागों को केंद्र के मानकों के अनुरूप तय समयसीमा में सुधार लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राज्य में उद्योगों की रफ्तार तेज हो सके।

 

विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत भूमिका

 

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान लगभग 26 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र की करीब 65 प्रतिशत इकाइयां औपचारिक रूप से पंजीकृत हैं, जिससे पारदर्शिता और राजस्व संग्रह में मजबूती आई है।

 

उत्तराखंड की यह रैंकिंग न केवल प्रशासनिक सुधारों की पुष्टि करती है, बल्कि निवेशकों के लिए राज्य को एक भरोसेमंद और तेज़ी से उभरते औद्योगिक गंतव्य के रूप में स्थापित भी करती है।

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