सियासत : कुमाऊं के कांग्रेसी विधायक ने अलापा गढ़वाल राग, प्रीतम भी आये साथ । कांग्रेस की गुटबाजी फिर एक बार सामने

पर्वतजन कुमाऊं कार्तिक उपाध्याय

 

कहा तो यह जाता है कि प्यार और जंग में सब कुछ संभव है,लेकिन आज इसके साथ अगर राजनीति को जोड़ें तो गलत नहीं होगा ।

राजनीतिक दलों की गुटबाजी समय-समय पर सामने आती रही है,फिर एक बार कुमाऊं के किच्छा विधानसभा से कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ ने गढ़वाल राग अलापा है,साथ ही यह तक कह डाला है कि कांग्रेस के प्रदेश संगठन को माफी मांगने दिल्ली जाना होगा तभी लोकसभा में अगला चुनाव जितना संभव हो पाएगा ।

तराई की राजनीति में एक मजबूत नेता माने जाते हैं तिलक राज बेहड़ जो कि इन दिनों अपने बयान से राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं, इनके बयान से कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर राज्य के मतदाताओं के सामने आ रही है।

तिलक राज बेहड़ ने कहा है कि कुमाऊं से अधिक सीटें कांग्रेस गढ़वाल में जीती है,उसके बाद भी प्रदेश संगठन ने नेता प्रतिपक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष का पद कुमाऊं की झोली में डाला हुआ है,जोकि गढ़वाल के साथ पक्षपात है ।

तिलकराज बेहड़ कहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष अथवा प्रदेश अध्यक्ष में से एक पद गढ़वाल को देना चाहिए वही उपनेता तराई के हिस्से में आनी चाहिए जो कि वर्तमान में है ।

कॉन्ग्रेस लगातार कोशिश तो कर रही है कि किसी भी तरह से लोकसभा चुनाव में मतदाता उनके पक्ष में वोट डाले परंतु अंदरूनी गुटबाजी कांग्रेस के लिए चिंता की स्थिति पैदा किये हुए हैं और ऐसे में तिलकराज बेहड़ का यह बयान फिर से एक बार कांग्रेस के प्रदेश संगठन एवं राष्ट्रीय संगठन के लिए चिंता का विषय बन गया है।

कहा यह जा रहा है की कांग्रेस के रुद्रपुर महानगर अध्यक्ष पद पर जगदीश तनेजा को हटाकर सीपी शर्मा को कमान सौंपने के बाद एक गुट विरोध में उतर आया, जिन्होंने किच्छा जाकर बेहड़ से मुलाकात भी करी जिसके बाद ही किच्छा विधायक के मन का दर्द सामने निकला ।

एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बेहड़ ने यहां तक कह डाला कि प्रदेश संगठन ने उनके साथ भी धोखा किया,बेहड़ ने बताया एआइसीसी सदस्यता को लेकर प्रदेश संगठन ने कहा कि अब वोटिंग सिस्टम हो चुका है इसके लिए वोट देने जाना पड़ेगा,मगर आप बीमार हैं,जबकि वह पहले भी सदस्य रह चुके हैं वोटिंग सिस्टम नहीं है ।

बेहड़ ने कहा कि वह अपनी मेहनत से यहां तक पहुंचे हैं 50 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई संघर्ष करें हैं

लेकिन प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर निर्णय तब लिया गया जब वह बीमार थे,पार्टी के इस निर्णय का मैंने सम्मान किया।

लेकिन उस समय प्रदेश संगठन से गलती हो गई हैं,इसे मानना ही पड़ेगा और दिल्ली जाकर प्रदेश संगठन को माफी मांगनी चाहिए और विचार करना चाहिए।

अब कुमाऊं के बेहड़ के गढ़वाल अलाप के बाद कांग्रेस पार्टी में फिर से हलचल एवं गुटबाजी बढ़ गई है।

यही नहीं अब *प्रीतम सिंह* भी बेहड़ के साथ खड़े नजर आ रहे हैं उन्होंने कहा है कि तिलक राज बेहड़ एक अनुभवी नेता है,वरिष्ठ नेता है उन्होंने जो कहा है उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,तो ऐसे में अब राजनीतिक चर्चाएं हैं कि क्या करन माहरा संगठन को नहीं संभाल पा रहे हैं।

अब देखना होगा प्रदेश कांग्रेस किस तरह इस डैमेज को कंट्रोल करती है और क्या तिलकराज बेहड़ की इस बात पर विचार करते हुए नेता प्रतिपक्ष या प्रदेश अध्यक्ष में बदलाव कर गढ़वाल के किसी नेता को इन जिम्मेदारियों के लिए चुनती हैं।

और यदि ऐसा होता है तो क्या जिसे भी इन पदों से हटाया जाएगा वह नाराज नहीं होंगे ।

सवाल यह भी हैं कि भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से भारत जोड़ने निकली कॉन्ग्रेस संगठन को जोड़े रखने में भी नाकाम नजर आ रही है,तो ऐसे में क्या प्रदेश एवं देश को जोड़ना कांग्रेस के लिए संभव हो पाएगा।

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