उत्तराखंड की संस्कृति की पहचान है पांडव नृत्य।

सतीश डिमरी गोपेश्वर (चमोली)

चमोली जिले के विकास खंड घाट के मोठा गांव में दिनांक- 29-11-2021 से प्रारम्भ पांडव का अपने आप में एक विशिष्ट महत्व है। पांडव नृत्य उत्तराखंड की संस्कृति की पहचान है।

इसी संस्कृति की पहचान को बनाए रखने के लिए आज भी उत्तराखंड के कई गावों में पांडवों के प्रतीक के रूप में पांडव नृत्य होता है।

यह नृत्य अनेकों पड़ावों से आगे बढ़कर समापन की ओर जाता है। इसी तरह घाट के मोठा गांव में हुए पांडव नृत्य में ग्राम वासियों ने भी बढ़चड़कर भाग लिया।

ग्राम वासियों का कहना है कि उनके गांव परम्परागत यह आयोजन हर 2 वर्ष में होता है, जो कि इस गांव की विशिष्ट पहचान है।

उनके द्वारा बताया गया कि पांडव नृत्य का यह आयोजन छ: पड़ावों से होकर गुजरता है, जो कि प्रथम तया अठारह पात्र के रूप में होता है। दूसरा पड़ाव पनवाणी के में छटवां पांडव पूजा होती है। इस तरह यह आयोजन चलता है।   आनंद सिंह महर का कहना है कि यह आयोजन ग्राम वासियों द्वारा बड़े ही भव्य तरीके से किया जाता है, ताकि यह सन्देश पूरे उत्तराखंड की संस्कृति बचाने सहयोग प्रदान कर सके। दिनांक- 04-12-2021 को यह आयोजन समापन हो जाएगा।।

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