गाजियाबाद के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छा मृत्यु की अनुमति मिलने के बाद उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है। पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन बिता रहे हरीश राणा की स्थिति में किसी तरह का सुधार न होने पर उनके पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें यह अनुमति दी।
हरीश राणा के वकील मनीष जैन के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5 बजे उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया। अस्पताल प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 5 से 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम बनाई है। डॉक्टरों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से की जाएगी और इससे जुड़ी जानकारी सीमित ही रखी जाएगी।
बताया जा रहा है कि पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया के तहत हरीश राणा को दी जा रही लिक्विड डाइट और शरीर से जुड़े अन्य मेडिकल ट्यूब्स को हटाया जाएगा। इसके बाद उन्हें सामान्य शारीरिक स्थिति में रखा जाएगा और प्राकृतिक रूप से जीवन समाप्त होने तक चिकित्सकीय निगरानी जारी रहेगी। मृत्यु के बाद उनका पार्थिव शरीर परिवार को सौंप दिया जाएगा।
परिवार ने हरीश राणा के अंग दान करने की इच्छा भी जताई है। इसके लिए डॉक्टरों की टीम पहले उनके अंगों की जांच करेगी और यह तय करेगी कि कौन-कौन से अंग दान के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इसके बाद आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
गौरतलब है कि करीब 13 साल पहले चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान हरीश राणा एक पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद से वह कोमा जैसी स्थिति में हैं। तब से उनके माता-पिता लगातार उनकी देखभाल कर रहे थे, लेकिन लंबे समय तक हालत में कोई सुधार न होने के कारण पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छा मृत्यु की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने पैसिव यूथेनेशिया की मंजूरी दे दी।




