घोटाले को निकाला तोड़, एक किलोमीटर पर 23 मोड़

विकास के लिए आया हुआ करोड़ों रुपया कैसे ठिकाने लगाया जाता है, यह कोई अधिकारियों और ठेकेदारों से सीखे। टिहरी जिले में मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर स्थित झील तक जाने के लिए पर्यटन विभाग ने एक किमी. की सड़क बना दी। एक किमी. की दूरी दिखाने के लिए सड़क पर 23 […]

विकास के लिए आया हुआ करोड़ों रुपया कैसे ठिकाने लगाया जाता है, यह कोई अधिकारियों और ठेकेदारों से सीखे। टिहरी जिले में मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर स्थित झील तक जाने के लिए पर्यटन विभाग ने एक किमी. की सड़क बना दी। एक किमी. की दूरी दिखाने के लिए सड़क पर 23 बैंड डाल दिए। सड़क का कार्य अभी चल रहा है और वर्तमान सरकार तथा उक्त विधानसभा के भाजपा विधायक भी उस पर खामोश हैं।
मामला यह है कि पर्यटन विभाग की स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत पूर्व पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने राजकीय निर्माण निगम को 80 करोड़ रुपए के काम सौंपे थे। इसके अंतर्गत 2 करोड़ की लागत से यह संपर्क मार्ग भी बनना था। 2 करोड़ रुपए की भारी-भरकम धनराशि खपाने के लिए सौ मीटर की दूरी पर एक किमी. की सड़क बनानी थी, इसलिए ठेकेदारों ने 23 मोड़ डालकर बजट ठिकाने लगा दिया। इसके लिए पूर्व में किया गया सड़क का अलाइनमेंट भी बदल दिया गया। हालांकि पर्यटन विभाग कहता है कि इस सड़क के निर्माण करने में जियोलॉजिस्ट की भी राय ली गई थी। इसके बावजूद यह सवाल अपनी जगह कायम है कि जियोलॉजिस्ट की राय के बाद पहले वाले एलाइनमेंट के अनुसार जो सड़क बनी थी, वह कैसे बह गई?
जाहिर है कि निर्माण निगम का चयन राज्य की डेढ़ दर्जन से अधिक कार्यदायी संस्थाओं में से मनमाने ढंग से किया गया। यदि टेंडर से निर्माण कार्य दिया जाता तो इसकी लागत भी कम आती और पहले वाली सड़क भी नहीं बहती।
जिला पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा कहते हैं कि यह कार्य सीधे निदेशालय स्तर से दिया गया है। इसलिए उनको इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। सूत्रों के अनुसार यह निर्माण कार्य मंत्रियों और विधायकों के चहेते ठेकेदारों को भारी-भरकम लाभ पहुंचाने के लिए सौंपा गया था।
प्रतापनगर के विधायक विजय सिंह पंवार कहते हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बनने वाली यह सड़क पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत हो चुकी है। ऐसे में उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है।

हालांकि योजना के कन्सलटेन्ट ने इस योजना में किसी भी तरह की अनियमितताओं के सवालों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि ग्राम सांदणा एवं झील के मध्य पूर्व में जिस एलाइनमेन्ट पर रोड बनाई गयी थी, वह आठ मांह तक जलमग्न थी। चूंकि 740 मीटर से 835 मी0 तक सम्पूर्ण झील क्षेत्र जलमग्न रहता है, जिसके कारण मिट्टी मे अस्थिरता बनी रहती है। यही कारण था कि पूर्व में बनाई गयी रोड बह गई। तदुपरांत सादणा से झील के 740 मीटर तल तक एक नए एलाइनमेन्ट पर बार्ज रोड का निर्माण किया जा रहा है। जहां तक 23 मोड आने का प्रश्न है। यह इसलिए कि बार्ज रोड का निर्माणं एक सीमित क्षेत्र एवं गहराई अधिक होने के कारण तथा रोड को उचित ढाल देने के कारण अधिक मोड आने स्वाभाविक है।
बहरहाल, मामला चाहे जो भी हो, लेकिन एक किलोमीटर सड़क पर 23 मोड़ देखने वालों का सर खूब चकरा रहा है।

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