डबल स्टैंडर्ड वाला डबल इंजन!

अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपनों को दे अपनी ही बातों से मुकरने लगी डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड  के लोगों ने उत्तराखंड की राजनीति में भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस पर पहली बार उत्तराखंड के डबल इंजन के पायलट त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख से सुना। भ्रष्टाचार पर कई बार कड़े बयान दे चुके मुख्यमंत्री […]

अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपनों को दे
अपनी ही बातों से मुकरने लगी डबल इंजन की सरकार

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उत्तराखंड  के लोगों ने उत्तराखंड की राजनीति में भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस पर पहली बार उत्तराखंड के डबल इंजन के पायलट त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख से सुना। भ्रष्टाचार पर कई बार कड़े बयान दे चुके मुख्यमंत्री से लोगों को उम्मीदें भी हैं, किंतु कुछ दिन पहले 50 वर्ष पूरे कर चुके सरकारी कार्मिकों की कार्य क्षमता की समीक्षा कर 50 पार लोगों को आवश्यक सेवानिवृत्ति देने की घोषणा पर सरकार ने जो शुरुआती बढ़त बनाई थी, वह बढ़त बढाने की बजाय अब नुकसानदेह साबित होती दिखने लगी है। सरकार के आवश्यक सेवानिवृत्ति के निर्णय की तब प्रशंसा हुई थी कि यह सरकार युवा बेरोजगारों के प्रति संजीदा है और हर हाल में बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए अपने चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार कृतसंकल्प है।
इस बीच इसी डबल इंजन की जीरो टोलरेंस वाली सरकार में सचिवालय में 120 की स्पीड से एक फाइल दौड़ रही है, जिस पर 31 जुलाई 2017 को उत्तराखंड के सबसे चर्चित लोक निर्माण विभाग ने अधिशासी अभियंता पद से सेवानिवृत्त हुए सूबे के वित्त एवं आबकारी मंत्री प्रकाश पंत के बड़े भाई कैलाश चन्द पंत को सरकार में पुनर्नियुक्ति दिए जाने के संदर्भ में फाइनल आख्या दी जानी शेष है। जो सरकार खुद 20 की स्पीड से चल रही है, उस सरकार में जब कोई फाइल 120 की स्पीड से दौड़े तो संदेह होना स्वाभाविक है।
उत्तराखंड के सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेजों और इंजीनियरिंग कालेजों से पॉलीटेक्निक और बीटेक कर चुके हजारों बेरोजगार रोजगार की आस में घर बैठे हुए हैं। ये वही युवा हैं, जिन्हें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भविष्य का भारत और न्यू इंडिया के खेवनहार बताते हैं। इन बेरोजगारों में से बड़ी संख्या में बेरोजगार अब नौकरी लगने की अधिकतम उम्र पार करने की दहलीज पर हैं तो उसे भी पार कर चुके हैं।
जिस प्रदेश में लाखों की संख्या में पंजीकृत बेरोजगार मौजूद हों, उस प्रदेश में अपनी सरकार के वित्त मंत्री के उस भाई को पुनर्नियुक्ति देना, जो कि 60 साल की उम्र पार कर रिटायर हो चुके हैं, से साबित होता है कि डबल इंजन की जीरो टोलरेंस वाली सरकार में आम लोगों के लिए कड़े नियम हैं और खास लोगों के लिए रेड कार्पेट बिछी हुई है।

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