उत्तराखंड की राजनीति से किशोर उपाध्याय को उत्तर प्रदेश विदा करने वाले विरोधी आजकल पूरे शवाब पर हैं। यह पहला अवसर है, जब समय से पहले किसी कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी छीनी गई। इससे पहले अध्यक्ष बने हरीश रावत और यशपाल आर्य को न सिर्फ कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिला, बल्कि दोनों को कार्यकाल विस्तार भी दिया गया। किशोर उपाध्याय को उत्तराखंड से बाहर कर उत्तर प्रदेश के वनवास पर भेजने के बाद कांग्रेस भवन में किशोर उपाध्याय की चर्चाएं कम नहीं हुई हैं। इन चर्चाओं के बीच नए-नए अध्यक्ष बने प्रीतम सिंह ने यह कहकर पुरानी बात पुख्ता कर दी कि वो आगामी चुनाव तक नई टीम का ऐलान नहीं करेंगे। प्रीतम सिंह की बात से ऐसा संदेश गया, मानो उत्तराखंड में हार के लिए सिर्फ किशोर उपाध्याय जिम्मेदार रहे हों। जब किशोर उपाध्याय द्वारा बनाई गई टीम से और काम करने वाली टीम के साथ प्रीतम सिंह को कोई समस्या नहीं तो संदेश तो यही जाएगा कि किशोर उपाध्याय ने ही हरवाया।

…तो समस्या सिर्फ किशोर से थी!
उत्तराखंड की राजनीति से किशोर उपाध्याय को उत्तर प्रदेश विदा करने वाले विरोधी आजकल पूरे शवाब पर हैं। यह पहला अवसर है, जब समय से पहले किसी कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी छीनी गई। इससे पहले अध्यक्ष बने हरीश रावत और यशपाल आर्य को न सिर्फ कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिला, बल्कि दोनों को कार्यकाल […]




