दिन मे तारे दिखते हैं उत्तरकाशी के इस गांव मे!

गिरीश गैरोला/ उत्तरकाशी// पीने के पानी  की किल्लत, स्वास्थ्य सेवा के लिए 80 किमी का आना-जाना पेंशन के लिए 6 महीने मे एक बार आते हैं ग्रामीण सूबे मे विकास का पैमाना क्या होता है, इसकी एक तस्वीर देखने के लिए उत्तरकाशी जनपद मे चिन्यालीसौड ब्लॉक के जोगत तल्ला गांव पहुंची टीम के सामने  ग्रामीणों […]

गिरीश गैरोला/ उत्तरकाशी//

पीने के पानी  की किल्लत, स्वास्थ्य सेवा के लिए 80 किमी का आना-जाना
पेंशन के लिए 6 महीने मे एक बार आते हैं ग्रामीण

सूबे मे विकास का पैमाना क्या होता है, इसकी एक तस्वीर देखने के लिए उत्तरकाशी जनपद मे चिन्यालीसौड ब्लॉक के जोगत तल्ला गांव पहुंची टीम के सामने  ग्रामीणों का जो दर्द छलका उसे शब्दों मे बयां करना बेहद मुश्किल है।
80 के दशक  से जोगत तल्ला गांव के लोग सड़क की मांग करते आ रहे हैं पर अफसोस उनकी यह मांग 37 साल बाद भी आज तक पूरी नहीं हो पायी।
सड़क न होने के कारण गांव के कई लोग अस्पताल जाते समय दम  तोड़ देते हैं। ऐसी दर्जनो  घटनाएं हो चुकी है।
जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से  सड़क मार्ग से 70 किमी दूर चिन्यालीसौड ब्लॉक मे भवानीपुर कस्बा पड़ता है। इस कस्बे के निकट से 5  किमी पैदल चलकर जोगत तल्ला गांव  पहुंचना पड़ता है।
गांव मे लगभग दो हजार की आबादी निवास करती है जो आज भी मूल-भूत सुविधाओं के अभाव मे जीने को विवश  है।

इनकी  बेबसी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  एक साल पहले जोगत तल्ला गांव की 22 वर्षीय रजनी घास काटते समय पहाड़ी से गिर गयी  थी।घायल अवस्था मे युवती को सड़क तक पंहुचने मे 4 घंटे लगे। लेकिन युवती ने सड़क पर पंहुचने से पहले ही दम  तोड़ दिया था।
सड़क मार्ग न होने के कारण दम तोड़ने वालों मे रजनी पहली लड़की नहीं है। पिछले 10 वर्षो मे गांव के करीब 6 लोग दम  तोड़ चुके हैं। पूर्व प्रधान व भूत पूर्व सैनिक मोहन लाल, पूर्व सैनिक जगत सिंह कैंतुरा , अर्जुन  सिंह कैंतुरा , प्रधान सीता देवी ने बताया कि इलाके मे कोई बैंक नहीं है , जिसके चलते चिन्यालीसौड मुख्यालय तक आने-जाने मे 80 किमी की दूरी और 160 रु किराया खर्च करना पड़ता है।क्षेत्र पंचायत सदस्य राम सिंह कहते हैं कि गांव मे पेय जल की भी किल्लत बनी हुई है। करीब 20 किमी दूर टिहरी जिले के किमखेत नामक स्थान से डेढ़ इंच की  पाइप  लाइन से गांव मे पानी  आता है जो पर्याप्त नहीं है।

इतना ही नहीं स्वास्थ्य सेवा के नाम पर करीब 10 किमी दूर दिचली मे आयुर्वेदिक अस्पताल है।  यंहा की व्यवस्था महज फर्मासिस्ट के ही भरोसे पर चल रही है। गांव मे जूनि

 

 

यर स्कूल के लिए 10 वर्षो से विद्यालय भवन स्वीकृत है किन्तु भवन आज तक नहीं बन सका। जबकि गांव के प्राथमिक विद्यालय  मे 55 बच्चों पर दो तो जूनियर मे 35 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है।
गांव मे 60 के करीब पूर्व सैनिक है जिन्हे पेंशन के लिए 40 किमी दूर ब्लॉक मुख्यालय चिन्यालीसौड जाना पड़ता है। सड़क तक पैदल 5 किमी की दूरी के चलते बुजुर्ग छह  महीने मे ही एक बार पेंशन लेने आते हैं।
पूर्व सैनिकों को मिलने वाली ईसीएच की स्वास्थ्य सुविधा भी 70 किमी दूर जिला मुख्यालय उत्तरकाशी मे है। सड़क तक 5 किमी की पैदल दूरी के चलते पूर्व सैनिक इस सुविधा का भी लाभ नहीं ले पाते  है।बीमार होने पर मरीज को पीठ पर लाद  कर ही 5 किमी की पैदल पहाड़ी चढ़कर बस का इंतजार करना होता है और ब्लॉक मुख्यालय चिन्यलीसौड तक 80 किमी और जिला मुख्यलय उत्तरकाशी तक 140 किमी का सफर  आने-जाने मे तय करना पड़ता है।गांव के पास जंगलों मे भेड-बकरी  चराने वाले ग्रामीण  उमेद सिंह को अनपढ़ रहने का बेहद  दुख है। उमेद की माने तो उनके समय मे 10 किमी पैदल दूर स्कूल होने के चलते वह पढ़ नहीं सके किन्तु उमेद  ये जरूर चाहता है कि  अगली पीढ़ी का कोई भी बच्चा पैदल दूरी के कारण अशिक्षित न रह जाय।

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