बलूनी के बहाने: बागी कांग्रेसियों को आइना,कोर टीम पर भरोसा

कुमार दुष्यंत

भाजपा ने राज्यसभा के लिए अनिल बलूनी के नाम पर मुहर लगा कर एक बार फिर कांग्रेस से भाजपा में  आए कांग्रेस के बागियों को भाजपा में उनकी हैसियत का अहसास करा दिया है।अभी तक इसके लिए विजय बहुगुणा का नाम चर्चाओं में था। अनिल बलूनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोर टीम के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री भी इसी टीम के सदस्य हैं। देहरादून के विधानसभा भवन में  नामांकन के बाद श्री बलूनी ने केंद्रीय तथा प्रदेश नेतृत्व का आभार जताया तो मुख्यमंत्री तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इसे पार्टी तथा सरकार के लिए खुशी का क्षण बताया।

टीएसआर के नजदीकी सूत्रों का मानना है कि इस निर्णय के बाद मुख्यमंत्री को दिल्ली से संबंधित मामलों में भी मदद मिलेगी।

विजय बहुगुणा को राज्यसभा भेजे जाने की राह देखने वाले कांग्रेस के बागियों में इसका क्या असर देखने को मिलता है, इसका भी सबको इंतजार है। फिलहाल दूसरे खेमे से कोई प्रतिक्रिया इस पर नहीं आई है।

प्रदेश से बाहर के तमाम चेहरों को नजरअंदाज करते हुए पौड़ी के बलूनी पर भरोसा जताकर राष्ट्रीय राजनीति में भी पहाड़ का दबदबा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार और भाजपा में शामिल कांग्रेस के बागियों का असंतोष जब-तब जाहिर होता रहा है।सरकार में मंत्री बने हुए बागी कांग्रेसियों के बयान से भाजपा के साथ-साथ सरकार भी कई बार असहज हुई है।काफी समय से यशपाल आर्य कोप भवन में हैं।हरकसिंह रावत ने कई बार सरकार के लिए समस्या खड़ी की है।लेकिन हर बार भाजपा प्रचंड बहुमत के शोर में बागी कांग्रेसियों को खामोश करती रही है।पिछले दिनों जब कुंवर प्रणवसिंह ने मुख्यमंत्री व नगरविकास मंत्री के खिलाफ जुबान खोली तो उन्हें भी अनुशासन के चाबुक से खामोश करा दिया गया।अनिल बलूनी के बहाने भाजपा ने विजय बहुगुणा को हाशिये पर किया है।

हरीश सरकार से बगावत के दौरान विजय बहुगुणा ने बागी कांग्रेसियों का नेर्तत्व किया था। बागियों कांग्रेसियों के भाजपा में शामिल होने के बाद तब चर्चा थी कि भाजपा आने वाले समय में विजय बहुगुणा को राज्यसभा भेजकर उनका ऋण चुकाएगी।राज्यसभा के लिए अंत तक दौड़ में उनका नाम बना भी रहा।लेकिन आखिर में बाजी बलूनी मार ले गये।समझा जा रहा है कि पार्टी के थिंक टैंक ने ही बागी कांग्रेसियों के दबाव-प्रभाव से मुक्त होने की नीति के तहत बहुगुणा को साईड लाईन कर अनिल बलूनी का नाम आगे किया है।

भाजपा का ये निर्णय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए बागी कांग्रेसियों के लिए अभी भी पूरी तरह भाजपायी न हो पाने का साफ संकेत है।

लगभग चौंकाते हुए अनिल बलूनी के नाम पर लगी मुहर से यह भी साबित होता है कि भाजपा हाईकमान अब उत्तराखंड में त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व को मजबूती देने के साथ ही युवा नेतृत्व को भी आगे लाने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है।

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