बिग ब्रेकिंग: गुप्ता बंधुओं की शादी में हैलीकॉप्टर पर हाईकोर्ट की रोक

कमल जगाती, नैनीताल

उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने स्कीइंग के लिए मशहूर औली में 200 करोड़ की चर्चित शादी के मामले में राज्य सरकार से पर्यावरण को संभावित हानि पहुँचाने के लिए करोड़ों रूपये की पैनल्टी समेत हैलीकॉप्टर सेवा पर रोक लगा दी है।

न्यायालय ने सरकार से ये भी साफ़ करने को कहा है कि क्या विवाह क्षेत्र बुग्याल क्षेत्र है जिसपर न्यायालय का पूर्व का एक आदेश लागु होता है ? न्यायालय ने इवेंट मैनेजर दिल्ली की ई फैक्टर इंटरप्राइजेज से पूछा है कि वे हीटिंग, कुकिंग आदि इक्विपमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और मेहमानों की संख्या कल न्यायालय को बताएं। न्यायालय ने उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से कहा है कि वो शादी के अन्त तक रहकर पर्यावरण में होने वाली क्षति को सुधरने में लगने वाली राशि का ब्यौरा न्यायालय को देंगे।
उत्तर भारत की सबसे चर्चित 200 करोड़ रूपये की शादी आज से औली में शुरू हो गई है। अधिवक्ता रक्षित जोशी की पर्यावरण नुक्सान को दायर एक जनहित याचिका के बाद इस हाई प्रोफाइल शादी में ग्रहण लग गया था।

न्यायालय में याचिकाकर्ता, उनके अधिवक्ता, इवेंट मैनेजर, वर वधु पक्ष और सरकार के अधिवक्ता मौजूद रहे। दो से तीन घण्टे चली बहस में ये साबित करने की कोशिश की गई कि ये शादी गैर क़ानूनी तरीके और उच्च न्यायालय के आदेशों के खिलाफ की जा रही है। न्यायालय शुरू से ही हिमालय के निचले हिस्से में आयोजित इस भव्य शादी के विरोध में दिखी।

साऊथ अफ्रीका के वर पक्ष, अजय गुप्ता और अतुल गुप्ता और दुबई में रहने वाले वधु पक्ष के बीच 18 से 23 जून तक चलना है । शादी का मुहूर्त 22 जून का तय हुआ है, जिसमें पहुँचने वाले मेहमानों के लिए आलिशान व्यवस्थाएं की गई थी। मेहमानों के लिए निजी हैलीपैड बनाए गए थे, ए.सी.टेंट लगाए गए, खाने की व्यवस्था सब बहार से की गई है। इवेंट ऑर्गेनाइजर के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि उन्हें नगर पालिका ने अनुमति दी है जबकि नगर पालिका का कहना है कि उन्होंने अनुमति नहीं अनापत्ति दी है।

राज्य सरकार ने हैलीपैड की अनुमति देने से इंकार कर दिया जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति अलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने औली में हैलीकॉप्टर लैंडिंग पर रोक लगा दी है। खंडपीठ ने राज्य सरकार से, ये भी साफ़ करने को कहा है कि क्या विवाह क्षेत्र बुग्याल क्षेत्र है, जिसपर न्यायालय का पूर्व का एक आदेश लागू होता है ?

न्यायालय ने इवेंट मैनेजर दिल्ली की ई फैक्टर इंटरप्राइजेज से पूछा है कि वे रूम हीटिंग, पकवान कुकिंग आदि के लिए इक्विपमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और मेहमानों की संख्या कल न्यायालय को बताएं। न्यायालय ने उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से कहा है कि वो शादी के अन्त तक वहीं रहकर पर्यावरण में होने वाली क्षति को सुधारने में लगने वाली धनराशि का ब्यौरा न्यायालय को देंगे तांकि शादी पक्ष से उसे वसूला जा सके।

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