शिक्षक संघ के दबाव में झुके निदेशक। दिया आश्वासन

मामचंद शाह
देहरादून स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में राजकीय माध्यमिक शिक्षकों की न्यायोचित समस्याओं के समाधान को लेकर चल रहा प्रदर्शन शिक्षा निदेशक आरके कुंवर के सकारात्मक आश्वासन के बाद संपन्न हो गया।
राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड ने शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण को लेकर विभाग, शासन एवं सरकार से 8 अगस्त 2017, 1 जनवरी 2018, 1 फरवरी 2018, 2 फरवरी 2018 को वार्ता की थी, किंतु समाधान के नाम पर सिर्फ कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं।
तदर्थ पदोन्नति के प्रकरण पर शासन के निर्देश एवं विभाग से लिखित सहमति के उपरांत भी आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं, जबकि नवंबर, दिसंबर 2017 में तदर्थ प्रोन्नत शिक्षकों की काउंसिलिंग के माध्यम से पदस्थापना की जा चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में प्रवक्ताओं के हजारों की संख्या में पद रिक्त हैं। जिस कारण राजकीय शिक्षक संघ ने छात्रहित को दृष्टिगत रखते हुए विद्यालय में अवकाश के दिन ब्लौक स्तर पर अपनी समस्याओं के समाधान को लेकर एक दिवसीय सांकेतिक धरना कार्यक्रम आयोजित किया। इसी प्रकार इन तमाम समस्याओं पर बार-बार अनुरोध करने के बावजूद आज तक उनका समाधान नहीं हो पाया है।
माध्यमिक शिक्षकों की निम्न समस्याएं हैं:-
शिक्षकों को भी एसीपी का लाभ दिया जाए। भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित एवं भूगोल विषयों की तदर्थ पदोन्नति की काउंसलिंग की जाए, सातवें वेतनमान के उपरांत वरिष्ठ, कनिष्ठ वेतन निर्धारण में उत्पन्न विसंगति से वरिष्ठ शिक्षकों को हो रही आर्थिक हानि को दूर किया जाए। तदर्थ विनियमित (शिक्षक बंधु) पूर्व सेवा का लाभ देते हुए चयन/प्रोन्नत वेतन दिया जाए। वर्ष 2018 की कोटिकरण की अनियमितताओं का स्थलीय निरीक्षण कर जांच की जाए और 2018 के कोटिकरण की विसंगतियों को दुरुस्त किया जाए, स्थानांतरण अधिनियम में विद्यालयी शिक्षा में अंतरमंडलीय स्थानांतरण का प्राविधान किया जाए तथा 50 वर्ष की महिलाओं, विधवा, परित्यक्ता, एनसीसी, एनएसएस के प्रभारियों को भी अनिवार्य स्थानांतरण में छूट दी जाए, सहायक अध्यापक एलटी में समायोजित प्राथमिक शिक्षकों को पूर्व सेवा का लाभ देते हुए चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत किया जाए।
इसके अलावा सहायक अध्यापक एलटी का मंडलीय कैडर समाप्त किया जाए। एलटी का चयन वेतनमान 5400 एवं प्रवक्ता का प्रोन्नत वेतनमान 7600 किया जाए। वर्ष 2003 में विज्ञापित पदों में वर्ष 2003-2004 नियुक्त सहायक अध्यापक एवं प्रवक्ताओं को पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए। कोटद्वार विधानसभा के कारण कार्यभार न कर पाने वाले शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। शारीरिक शिक्षा को विषय के रूप में सम्मिलित करते हुए बोर्ड द्वारा प्रस्तावित विषयों के इंटर स्तर पर प्रवक्ता (व्यायाम, कला एवं वाणिज्य) के पद सृजित किए जाएं। शिक्षकों को उनके द्वारा नियमानुसार बाल्य देखभाल अवकाश हेतु आवेदन करने पर 15 दिन का सीसीएल प्रधानाचार्य के द्वारा स्वीकृत करने का शासनादेश किया जाए। विद्यालय संचालन की एकरूपता हेतु स्पष्ट शासनादेश जारी किए जाए। प्रधानाध्यापक में पदोन्नति हेतु एलटी एवं प्रवक्ता की पारस्परिक वरिष्ठता का निर्धारण किया जाए। रमसा के अंतर्गत उच्चीकृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का नियमित वेतन आहरित किया जाए। शिक्षकों को कृपांक का लाभ दिया जाए। परिषदीय परीक्षा एवं मूल्यांकन में मानवीय भूल से हुई त्रुटि के कारण शिक्षकों की रोकी गई वेतन वृद्धि के निर्णय को वापस लिया जाए। यात्रा अवकाश का स्पष्ट शासनादेश किया जाए।
संगठन ने सरकार से अपेक्षा की है कि शिक्षकों की उक्त समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान किया जाए, ताकि शिक्षकों को प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए मजबूर न होना पड़े।
इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी, प्रांतीय महामंत्री डा. सोहन सिंह माजिला, प्रांतीय उपाध्यक्ष मुकेश बहुगुणा, प्रांतीय संयुक्त मंत्री योगेशचंद घिल्डियाल, प्रांतीय कोषाध्यक्ष चौधरी अनुज कुमार व शांति प्रसाद बड़थ्वाल के साथ दर्जनों शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित थे।

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