“हमारे टाइम भी पांच छोड़े थे पाकिस्तान ने, पर तब देशभक्ति का बाजार न था” : पूर्व सैनिक की स्मृति से

कुछ याद उन्हें भी कर लूं ,जो टीआरपी न बढ़ा पाए ..ऐ मेरे वतन के दर्शकों …. स्मृति चित्रण –मुकेश प्रसाद बहुगुणा भूतपूर्व सैनिक ,अभूतपूर्व मिर्ची बाबा परसों पकिस्तान ने विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा किया तो अपने वो पुराने दिन याद आ गए जब टीवी तो था ,किन्तु टीआरपी न थी। देशभक्ति तो थी […]

कुछ याद उन्हें भी कर लूं ,जो टीआरपी न बढ़ा पाए ..ऐ मेरे वतन के दर्शकों ….

स्मृति चित्रण –मुकेश प्रसाद बहुगुणा
भूतपूर्व सैनिक ,अभूतपूर्व मिर्ची बाबा

परसों पकिस्तान ने विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा किया तो अपने वो पुराने दिन याद आ गए जब टीवी तो था ,किन्तु टीआरपी न थी। देशभक्ति तो थी पर देशभक्ति का बाजार न था। देशभक्ति एक खबर पर 22 विज्ञापन न मिला करते थे लालाओं के माल के। तब टीवी पर पांच मिनट की देशभक्ति और बीस मिनट के कमर्शियल ब्रेक न हुआ करते थे।

बात सन 1987 की है। 22 जनवरी1987 को ऑपरेशन ब्रासटैक्स के लिए मोबलाईजेशन शुरू हुआ।
फ़रवरी के तीसरे हफ्ते के अंत तक हम सब अपने अपने स्थान पर तैनात हो चुके थे। जब तक कुछ होता तब तक “ क्रिकेट डिप्लोमेसी “ काम कर चुकी थी ,,तनाव कम हो चुका था , मार्च का महीना शुरू हो गया था किन्तु पर अभी कुछ निश्चित न था।मोर्चे और तैयारियां यथावत थे ।

मैं उन दिनों सूरतगढ़ सेक्टर में था। मार्च के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में (ठीक से याद नहीं ) किसी एक दिन दोपहर में हमारा अपनी एक मोबाइल ऑब्जरवेशन पोस्ट के पांच साथियों से संपर्क टूट गया। शाम तक कोई खबर नहीं ,राजस्थान सेक्टर में सीमा निर्धारण करना बहुत मुश्किल है , एकबारगी लगा कि कहीं गलती से हमारे साथी पाकिस्तान सीमा में न पहुँच गए हों।पूरी शाम और रात अंदाजों में गुजरी।

अगले दिन सुबह तक खबर मिली कि हमारे पांच साथी गलती से पाकिस्तानी सीमा पार गए थे और उन्हें पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा पकड़ लिया गया है (उन दिनों आज की तरह पल पल की प्रामाणिक सूचना देने वाला व्हट्स एप ,फेसबुक या खबरिया चैनल न थे ,अखबार हुआ करते थे जो हम तक दो या तीन दिन बाद पहुँचते थे ,एकमात्र रेडिओ या दूरदर्शन –काले सफ़ेद टीवी वाला – था ,जो देशप्रेम की खबरों की बजाय मत्स्य पालन ,कृषि सुधार ,गोबर गैस से चूल्हा जलायें या फीता कृमि से मुक्ति कैसे पायें जैसे कार्यक्रम ज्यादा दिखाते थे )

हम सब फिर अपने अपने अंदाज लगाने पर लग गए ,पुष्ट जानकारी का केंद्र उन दिनों बार में बैठे सीओ साहब के ड्राइवर या ऑफिस के वे क्लर्क हुआ करते थे ,जो कभी सच नहीं बताते थे (नियम यह भी है कि हर सच बताया नहीं जाता , हां पर आजकल टीआरपी प्रेमी टीवी चैनल्स पर यह नियम लागू नहीं होता ,और उन दिनों ‘बार डे’ भी रोज नहीं बल्कि हफ्ते में एक दिन होता था )।

छः दिन बाद ज्ञात हुआ कि सबको सकुशल मुक्त कर दिया गया है। (पकड़ा राजस्थान क्षेत्र में था और छोड़ा अटारी बार्डर पर गया था )  काश उन दिनों आज का माहौल होता ,तो हमारे वे साथी भी देश के हीरो होते ( आज तो उनका नाम भी याद नहीं है ) ।

Also Read This

बड़ी खबर: सावन में चमका सोना, चांदी में गिरावट;  जानें आज के ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सावन के महीने में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।मंगलवार 11 अगस्त 2026 के कारोबार में...

हादसा: 300 मीटर गहरी खाई में गिरी कार। चार लोग थे सवार

ब्रेकिंग न्यूज़(कमल जगाती, नैनीताल):- ऊत्तराखण्ड में नैनीताल के ताकुला में कार गहरी खाई में गिरी। लगभग 300 मीटर गहराई से पुलिस ने स्थानीय लोगों...

Related Posts