सब इंस्पेक्टर के रूप में भक्त की रक्षा के लिए प्रकट हुई माता यमुना
रांझी राजक को मिला जीवन दान
गिरीश गैरोला
घर और मंदिर की दीवारों पर टंगी तस्वीरो से भिन्न होते है भगवान, और कोई भी रूप धारण कर भक्तो की मदद करने पहुंच जाते हैं भगवान।
यमनोत्री धाम दर्शन को आये मध्य प्रदेश के यात्री रांझी राजक की डबडबायी आंखें इन्ही शब्दों को बुदबुदाकर माँ यमुना और उस परमपिता परमात्मा के साथ पुलिस की खाकी वर्दी को भी ईश्वर स्वरूप मानकर गदगद भाव से शुक्रिया अदा कर रहे हैं।
जानकर आश्चर्य होना लाजमी है, अब तक खाकी पर कई आरोप इस कदर लगे हैं कि भगवान अब तक किसी भी रूप में प्रकट हुए हो किन्तु खाकी पहनकर भी भक्तों के संकट दूर करने पहुंच जाए, और खुद कंधों पर लादकर पैदल चले , यकीन करना मुश्किल होता है , किन्तु ये हकीकत है।
मंगलवार को यमनोत्री धाम दर्शन को आये एमपी निवासी रांझी राजक को जानकी चट्टी – यमनोत्री पैदल मार्ग पर भैरो मंदिर के ऊपर हाई ब्लड प्रेशर के चलते बैचनी होने लगी। इसी बीच पैदल मार्ग पर यात्रियों और घोड़ा पालिमकियों के आवागमन से लग रहे जाम को खुलवाने के लिए चौकी प्रभारी यमनोत्री एसआई लोकेंद्र बहुगुणा मौके पर पहुंचे और उन्होंने यात्री को घोड़े पर चढ़ाने का प्रयास किया किन्तु सीने में हो रहे दर्द के कारण वह संतुलित होकर नही बैठ पा रहे थे। इस बीच यात्री की गंभीर स्तिथि को भांप कर इस नौजवान पुलिस अधिकारी ने बिना मौका गंवाए यात्री को अपनी पीठ पर लाद कर दो किमी दूर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया । इसके लिए उन्होंने डंडी- कंडी अथवा पालकी का भी इंतजार नही किया।
ठीक समय पर डॉक्टरी मदद मिल जाने से यात्री की जान बच गयी। डॉ. की माने तो जरा से भी देरी यात्री की मौत का कारण बन सकती थी। यात्री को हाई ब्लड प्रेशर के चलते अटैक के कारण मौत का खतरा था। स्वास्थ्य लाभ के बाद यात्री के मुंह में बोलने को शब्द कम पड़ रहे थे। जिन आंखों ने आजतक खाकी का केवल रौब और डंडा ही देखा था, आज उन्होंने इसका दूसरा रूप भी देख लिया। लिहाजा वह इस पुलिस अधिकारी के पैरों में गिरकर धन्यवाद देने लगा।
“इस घटना के बाद ये तो तय हो ही गया कि भगवान बांसुरी बजाते हुए या चक्र लिए ही नही दिखते बल्कि कभी कभी खाकी वर्दी पहन कर भी प्रकट हो जाते हैं, खाकी के अंदर के इंसान को भगवान की तुलना मिलने से एक बार दिल से ऐसे वर्दीधारी अधिकारी को सैलूट करने की इच्छा है।”
गौरतलब है कि उत्तरकाशी भ्रमण पर आए डीआईजी पुष्पक ज्योति ने भी अपने व्यवहार से जनता की दिल जीतने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रेरित किया था । उन्होंने इंग्लैंड की मित्र पुलिस का प्रतीक बन चूके बॉबी को आदर्श मानते हुए उत्तराखंड पुलिस को भी अपने व्यवहार से पुलिस की छवि बदलने की सलाह दी थी। अब देखना है इस अधिकारी के कार्य को कब तक प्रेरक बनाते हुए उन्हें सम्मानित किया जाता है। ताकि अन्य लोग भी इसका अनुसरण कर सकें।





