बस एक सीट का सवाल: थम जाएगा बवाल

कुमार दुष्यंत// सौरभ को मंत्री चाहते हैं बहुगुणा! देहरादून। राज्य सरकार में फेरबदल की चर्चाओं के बीच कुछ विधायकों ने अपनी संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं।मंत्रीमंडल में एडजस्ट होने के लिए कुछ  सरकार पर दबाव तो कुछ जोड़तोड़ बनाने में जुट गये हैं।पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से मुलाकात […]

कुमार दुष्यंत//

सौरभ को मंत्री चाहते हैं बहुगुणा!

देहरादून। राज्य सरकार में फेरबदल की चर्चाओं के बीच कुछ विधायकों ने अपनी संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं।मंत्रीमंडल में एडजस्ट होने के लिए कुछ  सरकार पर दबाव तो कुछ जोड़तोड़ बनाने में जुट गये हैं।पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से मुलाकात को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार संघ के दो बड़े नेताओं दत्तात्रेय हॉसबोले व कृष्णगोपाल ने राज्यसरकार की प्रगति रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी है।जिसमें सरकार के काम को औसत बताया गया है।कुछ मंत्रियों के कामकाज व नाराजगी का जिक्र भी रिपोर्ट में है।जिसके बाद मंत्रीमंडल को दुरुस्त कर कामकाज में तेजी लाने के निर्देश हाईकमान द्वारा दिये गये हैं।इस सबके बीच मुख्यमंत्री की दिल्ली के हैदराबाद भवन में प्रधानमंत्री से मुलाकात से फेरबदल की चर्चाओं को बल मिला है।इन संभावनाओं के चलते कुछ विधायकों ने संभावित फेरबदल में अपनी संभावनाएं बनाने के लिए जोर आजमाइश शुरू कर दी है।मुख्यमंत्री की दिल्ली में मौजूदगी के दौरान विजय बहुगुणा की विधायक सौरभ बहुगुणा के साथ अजय भट्ट से उनके आवास पर मुलाकात को इसी नजरिये से देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व में ही पिछले वर्ष कांग्रेस के ग्यारह विधायक भाजपा में गये थे। लेकिन राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद बहुगुणा ने राज्य की राजनीति में रुचि लेनी ही बंद कर दी।जबकि अपने छोटे पुत्र सौरभ को सितारगंज से टिकट दिलवा कर विधायक बनवाने में वह कामयाब रहे थे।इस सबको कहीं न कहीं विजय बहुगुणा की नाराजगी के तौर पर ही देखा जा रहा था।माना यही जा रहा था कि अपने साथ गए कांग्रेसी विधायकों के मंत्रीमंडल में शामिल हो जाने के बाद वह अपने लिए भी कुछ चाहते थे।लेकिन सौरभ की अन्य विधायकों के समक्ष कनिष्ठता व सरकार पर मूल भाजपाइयों के प्रभाव के कारण तब विजय बहुगुणा के हाथ खाली रह गये।हालांकि मंत्रीमंडल की संख्या स्वीकृत ढांचे से अधिक नहीं हो सकती।इस स्थिति में यदि फेरबदल होता भी है तो भी मुन्ना सिंह चौहान व यतिश्वरानंद जैसे एकाधिक बार के विधायकों का दावा ही मजबूत रहेगा।इन हालात में पूर्व मुख्यमंत्री की कोशिशें कितना रंग लाएंगी, देखना होगा.

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