हेल्थ

श्री महंत इंदिरेश अस्पताल मे नशा मुक्ति केन्द्र शुरू। योग ध्यान की भी होगी क्लास

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में नशा मुक्ति  
एवम् पुनर्वास केन्द्र जनता की सेवा में समर्पित
# उत्तराखण्ड राज्य का एकमात्र केन्द्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक संचालित
# मरीजों को योग व ध्यान साधना की विशेष कक्षाएं दीं जाएंगी, जीवन की मुख्यधारा में शामिल करने को योग बनेगा एक मुख्य माध्यम
देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र ने सेवाएं देनी प्रारम्भ कर दी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की गाइडलाइन के मुताबिक देश भर में कुछ गिने चुने नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र ही काम कर रहे हैं। इन नशा मुक्ति केंद्रों की देखरेख में नशे के आदी लोगों को नशे से मुक्त कर नया जीवन देने का काम किया जा रहा है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल का यह विशेष केन्द्र उत्तराखण्ड व पड़ोसी राज्यों के मरीज़ों के लिए एक वरदान साबित होगा।
मंगलवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र का शुभारंभ श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ पीताम्बर प्रसाद ध्यानी, एसजीआरआर इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज़ के प्राचार्य डाॅ अनिल कुमार मेहता, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के अपर चिकित्सा अधीक्षक डाॅ वीके बिहारी व मनोरोग विभाग के प्रमुख डाॅ सुमित खत्री ने संयुक्त रूप से किया।
प्राचार्य डाॅ अनिल कुमार मेहता ने अपने सम्बोधन में कहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में उत्तराखण्ड का पहला नशा मुक्ति एवम् पुर्नवास केन्द्र स्थापित हुआ है। यह केन्द्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की गाइडलाइन के मुताबिक स्थापित उत्तराखण्ड का एकमात्र केन्द्र है। इस नशा मुक्ति एवम् पुर्नवास केन्द्र में 15 बिस्तरों के वार्ड (जनरल वार्ड एवम् वीआईपी वार्ड), नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास के लिए 24×7 राउंड दि क्लाॅक विशेषज्ञ डाॅक्टरों की टीम उपलब्ध है।

यह केन्द्र इस लिए भी खास है कि यहां पर मरीजों को डाॅक्टरी परामर्श व दवाओं के साथ साथ योगा, म्यूज़िक थेरेपी, प्ले थेरेपी, ग्रुप थेरेपी की सुविधाएं भी दी जा रही हैं। यहां पर पुनर्वास उपचार के लिए दीर्घकालीन आवासीय उपचार की सुविधा भी उपलब्ध है।
चिकित्सा अधीक्षक डाॅ वीके बिहारी ने कहा कि नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र में उपचार के साथ साथ विभिन्न थैरपी भी शमिल की गई हैं। खास तौर पर मरीजों को योग व ध्यान मुद्राओं की विशेष थैरपी दी जाएंगी। योग उनके उपचार में महत्वपूर्णं भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञ योग प्रशिक्षकों की देखरेख में उन्हें योग मुद्राएं करवाए जाएंगी व ध्यान साधना के साथ जोड़ा जाएगा। योग-ध्यान व योग साधना के माध्यम से मरीजों को समग्र स्वास्थ्य के प्रति तैयार किया जाएगा। उन्हें सिखाया जाएगा कि वे अपने शरीर, मन व इन्द्रियों को नियंत्रित कर वे किस प्रकार स्वंय के आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं व सकारात्मक सोच को विकसित कर सकते हैं। योग साधना की यह विशेष कक्षाएं नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र में आए मरीजों को जीवन की मुख्य धारा में जोड़ने के लिए अहम भूमिका निभाएंगी।
मनोरोग विभाग के प्रमुख डाॅ सुमित खत्री ने कहा कि अस्पताल के मनोरोग विभाग में नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह उत्तरखण्ड के लिए भी बहुत अच्छी राहत की बात है कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में हम ऐसे आधुनिक केन्द्र के माध्यम से मरीजों को सभी अत्याधुनिक सेवाएं प्रदान करेगा।
मनोरोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ शोभित गर्ग ने कहा कि शौक-शौक मंे शुरू की गई सिगरेट, शराब व अन्य नशे की आदतें कब लत का रूप ले लेती हैं, पता ही नहीं चलता है। नशा ले रहे व्यक्ति के बारे में यदि समय पर जानकारी मिल जाती है तो काफी हद उसका पूर्णं उपचार भी सम्भव है। ऐसे मरीज़ जो सामान्य नशे से अति गम्भीर नशों की गिरफ्त में फंस चुके हैं उनके लिए नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र का दीर्घकालीन अबाधित उपचार बेहद मददगार है। लंबे समय से सिगरेट, शराब, गाँजा, भाँग, अफीम, स्मैक, कोकीन, तम्बाकू, वाहिटनर, नेल पाॅलिश रिमूवर, नशे की गोलियों का सेवन करने वाली मरीज़ श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के नशा मुक्ति एवम् पुनर्वास केन्द्र में सम्पर्क कर सकते हैं। इस अवसर पर उप प्राचार्य एसजीआरआर मेडिकल काॅलेज डाॅ अनिल कुमार धवन, डाॅ अमित वर्मा, डाॅ राजीव आजाद, डाॅ सुमित मेहता आदि मौजूद थे।

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