सलाहकार का सिक्सर!

अपने नंबर बढ़ाने के लिए निकाला अनोखा नुस्खा उत्तराखंड की डबल इंजन की सरकार भले ही कड़े फैसले लेने में अभी तक घबरा रही हो, किंतु किचन कैबिनेट के लोगों ने अपने-अपने अनुसार डबल इंजन को मजबूती प्रदान करने के लिए बेहतरीन निर्णयों की एक सूची तैयार कर दी है। सूचना क्रांति के इस दौर […]

अपने नंबर बढ़ाने के लिए निकाला अनोखा नुस्खा

उत्तराखंड की डबल इंजन की सरकार भले ही कड़े फैसले लेने में अभी तक घबरा रही हो, किंतु किचन कैबिनेट के लोगों ने अपने-अपने अनुसार डबल इंजन को मजबूती प्रदान करने के लिए बेहतरीन निर्णयों की एक सूची तैयार कर दी है। सूचना क्रांति के इस दौर में हर एक अपने नंबर बढ़ाने के लिए इस कदर आतुर है कि उन्हें अब इतिहास भूगोल की भी फिक्र नहीं। शाम ढलने के बाद इसी तरह की एक ब्लैक टी पार्टी में किचन कैबिनेट किचन में बैठी तो सबने सरकार की ब्रांडिंग के लिए अपने-अपने सुझाव दिए कि किस तरह उत्तराखंड के इंजन को उत्तर प्रदेश और दिल्ली वाले इंजन की टक्कर का बनाया जाए। बारी-बारी से आए सुझावों के बीच एक सुझाव ऐसा आया कि किचन में सन्नाटा पसर गया। सलाहकार ने अपने तोणीर से ब्रह्मास्त्र निकालते हुए तीर चलाया कि उनके पास एक ऐसा शानदार आइडिया है कि अगर मुखिया जी मान जाएं तो ९० प्रतिशत समस्या का समाधान हो जाएगा। अपने अनुभवों पर लंबा व्याख्यान देते हुए सलाहकार महोदय ने बताया कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय इलेक्ट्रोनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया तो सरकार के साथ है और वही कर रहा है जो सरकार चाहती है या सरकार के लिए बेहतर है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लंबे समय से उत्तराखंड में छोटे मझोले क्षेत्रीय मीडिया ने सरकार की नाक में दम किया हुआ है और ये लोग माहौल खराब करने की स्थिति में हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली के कॉमनवेल्थ जैसे बड़े घोटाले की पोल भी वहां से छपने वाले एक छोटे से अखबार ने खोली। साथ ही बहुचर्चित बलात्कारी गुरमीत राम रहीम का प्रकरण भी इसी प्रकार के छोटे अखबार ने खोला था। सलाहकार महोदय ने देशभर के छोटे-छोटे अखबारों द्वारा इस प्रकार सरकार की पोल-पट्टी खोलने और आईना दिखाने के उदाहरण दिए। अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनके विचार को मान लिया जाए तो क्षेत्रीय मीडिया की दुकानों पर ताला लगवाया जा सकता है और इसके बाद सरकार के लिए किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं होगी।
सलाहकार की इस सलाह का आने वाले वक्त में क्या असर होता है, यह तो बाद में देखा जाएगा, किंतु सलाहकार महोदय सलाह देते वक्त भूल गए कि हाईटेक जमाने में फोन टेपिंग से पहले स्टिंग और रिकार्डिंग का भी दौर है।

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