अतिक्रमण हटाओ अभियान: डीएम की कप्तानी में सब्जी मंडी क्लीन बोर्ड। स्थगन आदेश से पूर्व ध्वस्त हुई 54 दुकानें।

गिरीश गैरोला
9 जून को उत्तरकाशी के विश्वनाथ चौक , अस्पताल रोड, कोतवाली रोड से सुरु हुआ अतिक्रमण अभियान उसी दिन स्थगित होने के बाद 25 जून को फिर शुरु हुआ। सब्जी मंडी में स्थित करीब 54 खोकों को भारी पुलिस फोर्स के साथ पालिका कर्मचारियों और लोक निर्माण विभाग की जेसीबी मशीन से जमीदोज कर दिया गया। जिला प्रशासन ने जियो ग्रिड दीवार के पीछे सब्जी मंडी के व्यापारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था देने का सुझाव देते हुए मार्किंग भी शुरु की किन्तु मंडी के व्यापारी अपनी दुकानें खाली करने को तैयार नही हुए, जिसके बाद जेसीबी मशीन ने एक तरफ से सभी अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए।
मंडी व्यापारी महेश गौड़ ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने बिना नोटिस के उनकी दुकानों को तोड़ा है, जिसमे करीब 54 दुकानदार अपनी जीविका चलाते थे। जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट से स्थगन आदेश भी प्राप्त कर लिया था और डीएम की मेल के साथ उन्हें दूरभाष पर जानकारी दे दी थी, इसके बाद भी दुकाने तोड़ने का काम जारी रखा गया।
वही स्थानीय निवासियों ने अतिक्रमणकारियों को अन्य स्थान पर बसाए जाने का विरोध किया। स्थानीय व्यवसायी दिनेश पंवार ने कहा कि इस प्रक्रिया से अतिक्रमण को ही बढ़ावा मिलता है।
डीएम ने कहा कि उनके द्वारा सब्जी मंडी  की वैधानिकता के लिए मजिस्ट्रेट जांच करवाई गई थी और उसी आधार पर अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरु किया गया था। आगे भी जांच कमेटी की सिफारिश पर अभियान शुरु किया जाएगा।
स्थगन आदेश से बदल गयी परिस्थिति
बताते चलें कि सब्जी मंडी व्यापारियों द्वारा पालिका को 50 हजार की एक से लेकर तीन क़िस्त तक जमा करवाई गई थी। इतना ही नही इस एवज में पालिका को उन्हें दुकान बनाकर देनी थी, किन्तु पालिका ने बिना दुकान निर्माण करवाये ही न सिर्फ भूतल पर, बल्कि प्रथम तल की दुकानें आवंटित कर किराया लेना भी शुरु कर दिया। साथ ही यह भी शर्त एग्रीमेंट में रख दी कि पालिका कभी भी जन हित में इन दुकानों को खाली करवा सकती है। ऐसे में पालिका के छोटे व्यापारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। स्थगन आदेश के बाद मामला हाई कोर्ट में होने के चलते जिला प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था से भी हाथ खींच सकता है। संभावना है कि कोर्ट के निर्देश के बाद ही उसी अनुरूप कार्य होगा। जिसके बाद उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था  देने पर भी अड़ंगा लग सकता है।
यहाँ बताना जरूरी है कि 9 जून को नगर के एक हिस्से में अतिक्रमण हटाये जाने के बाद अचानक अभियान रोके जाने के खिलाफ पीड़ित व्यापारियों ने बाजार बंद कर जुलूस निकाला और प्रशासन से जबाब मांगा, साथ ही अतिक्रमण हटाने मे दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए 28 जून से आमरण अनसन शुरु करने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद अतिक्रमण अभियान फिर से शुरु करने की जिला प्रशासन की मजबूरी भी बन गयी थी। जिला प्रशासन को व्यापारियों द्वारा हाई कोर्ट में जाने की पूर्व सूचना मिल चुकी थी, किन्तु कोर्ट का  आदेश पहुंचने से पहले अतिक्रमण हटा लिया गया। अब पीड़ित व्यापारियों का गुस्सा नगर पालिका को लेकर भड़क सकता है, जिसने न सिर्फ उनसे 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रु की क़िस्त जमा करवाई,  मासिक किराया भी  लिया और उन्हें दुकान बनाकर देने की बजाय उस जमा धन से अपने कर्मचारियों को वेतन बांट दिया।

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