अभागा: कंधे पर लादकर ले गया लाश। एंबुलेंस नहीं मिली दून अस्पताल में

देखिए वीडियो किस तरह कंधे पर लादकर ले गए लाश ! एंबुलेंस नहीं मिली दून अस्पताल मे https://youtu.be/mvRFTdXIoc0 पैसे के अभाव में अपने मृत परिजनों की लाश को एंबुलेंस के बजाए कंधे पर ढोना अब केवल दूसरे गरीब कहे जाने वाले राज्य की उपलब्धि नहीं बल्कि उत्तराखंड उसमें शामिल हो गया है। गुरुवार 3 तारीख […]

देखिए वीडियो किस तरह कंधे पर लादकर ले गए लाश ! एंबुलेंस नहीं मिली दून अस्पताल मे

https://youtu.be/mvRFTdXIoc0

पैसे के अभाव में अपने मृत परिजनों की लाश को एंबुलेंस के बजाए कंधे पर ढोना अब केवल दूसरे गरीब कहे जाने वाले राज्य की उपलब्धि नहीं बल्कि उत्तराखंड उसमें शामिल हो गया है। गुरुवार 3 तारीख को पंकज नाम के व्यक्ति को अपने भाई सोनू की लाश  कंधे पर ढोकर दून अस्पताल से बाहर ले जानी पड़ी।

https://youtu.be/9gd6vV4c9gc

दून अस्पताल प्रशासन ने लाश को ले जाने के लिए एंबुलेंस देने से मना कर दिया। जब पंकज ने 108 सेवा से गुहार लगाई तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए कि वह मरीज ढोते हैं लाश नहीं।

सोनू को दून अस्पताल में फेफड़ों में इंफेक्शन की शिकायत पर भर्ती कराया गया था लेकिन गुरुवार को उसने दम तोड़ दिया।

धामपुर का रहने वाला पंकज फल की ठेली लगाता है और उसका भाई सोनू हलवाई का काम करता था। जब धामपुर में इलाज नहीं मिला तो डॉक्टरों की सलाह पर वह उसे दून अस्पताल ले आया था। सोनू की मौत के बाद पंकज को काफी गुहार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली।

एंबुलेंस के कर्मचारियों ने ₹5000 की मांग की किंतु पंकज और उसके परिजनों के पास मात्र ₹1000 ही निकले।

दून अस्पताल के सीएमएस  केके  टम्टा का कहना है कि एंबुलेंस का खर्च ₹18 प्रति किलोमीटर  भुगतान करना होता है। 108 सेवा के ऐड मनीष टिंकू का कहना है कि वह किसी भी राज्य में अपने वाहन में लाश नहीं ढोते फिर भी यदि अस्पताल प्रशासन मांग करता तो वह वाहन उपलब्ध करा सकते थे।

पंकज अपने भाई की लाश को कंधे पर लादकर दून अस्पताल से बाहर ले आया और बिजनौर के लिए निकल पड़ा। वह भाई की लाश को एमकेपी कॉलेज तक लेकर पहुंचा ही था कि अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने उसकी मदद करने के लिए उसे वापस बुला लिया  और आपस में चंदा एकत्र लिया किंतु वह भी मिलकर ₹5000 एकत्र नहीं कर सके।

हालांकि बाद में एक निजी एंबुलेंस चालक का दिल पसीजा तो वहा ₹3000 में ही धामपुर जाने को राजी हो गया। इस बीच यह खबर फैली तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर एक व्यक्ति मृतक के भाई को 15 सौ रुपए की धनराशि भी थमा आया। बहरहाल किसी तरह इंतजाम करके मृतक को धामपुर पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इसका कड़ा संज्ञान लेते हुए आइंदा इस तरह की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए सख्त ताकीद कर दी है। संवेदनहीनता दिखाने के लिए अस्पताल प्रशासन का भी जवाब तलब किया गया है।

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