एक्सक़्लूसिव: मेयर प्रत्याशी ग़ामा ने चुनाव जीतने को पकड़ी त्रिवेंद्र रावत से अलग राह

निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने पूरे प्रदेश में अपनी पसंद के लोगों को टिकट दिलवाए देहरादून मेयर का टिकट त्रिवेंद्र रावत के वीटो पर सुनील उनियाल ग़ामा को दिया गया, जो आज तक जीवन में कोई चुनाव नहीं जीते। त्रिवेंद्र रावत ने ग़ामा को टिकट देने से पहले ग़ामा को जिताने के लिए हाईकोर्ट के अतिक्रमण अभियान को रोकते हुये जिन अवैध बस्तियों को तोड़ने से बचाने के लिए अध्यादेश लाया और बताया कि इन बस्तियों को अगले तीन साल तक तोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना में समाहित किया जाएगा। इस अध्यादेश के बाद सरकार की जमकर आलोचना भी हुयी कि दो फ़ीट क़ब्ज़ाने वालों के मकान तोड़ दिए और पूरी नदी क़ब्ज़ाने वालों को बचाने के लिए अध्यादेश ले आए।
इस बीच चुनाव के दौरान हाई कोर्ट ने अगले तीन महीने में नदी किनारे की अवैध बस्तियों को हटाने का आदेश दिया तो ग़ामा के सारे समीकरण गड़बड़ा  गए। अपनी सीट जीतने के लिए ग़ामा ने घोषणा की कि यदि वो मेयर बन गए तो नगर निगम की पहली बैठक में सभी बस्तियों को नियमितिकरण करवा देंगे। ग़ामा की इस घोषणा से त्रिवेंद्र रावत द्वारा अगले तीन सालों में बस्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना में मिलाने की घोषणा को पलीता लगना तय है। ग़ामा की घोषणा से त्रिवेंद्र रावत समर्थक भी असहज है कि ग़ामा की इस पहलवानी का कैसे बचाव करे, जिसने अपने चक्कर में मुख्यमंत्री का भी लिहाज़ नहीं किया। जिनकी कृपा से ग़ामा मैदान में खड़ा है।
बहरहाल ग़ामा की घोषणा से मुख्यमंत्री के समर्थक और कोर टीम दोनो आक्रोशित हैं।

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