एक्सक्लूसिव: कार्बेट पार्क में वीआईपी खातिरदारी से नये निदेशक चतुर्वेदी की ना।

कमल जगाती, नैनीताल

देशभर से वी.आई.पी.खातिरदारी का दबाव और स्टाफ की कमी से जूझ रहे रामनगर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने ऐसे आवेदनों को और ज्यादा तवज्जो देने से लिखित इनकार कर दिया है। हालांकि उत्तराखण्ड के विशेष मेहमानों मसलन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य को विशेष सुविधाएं जारी रहेंगी ।
कॉर्बेट नेशनल पार्क के कार्यकारी निदेशक संजीव चतुर्वेदी ने आदेश पत्र जारी कर कहा है कि भविष्य में ऐसे किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा उस आवेदन को उसी के कार्यालय और उच्चाधिकारियों को पद और जिम्मेदारियों का दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कार्यवाही करने के लिए भिजवा दिया जाएगा।

कॉर्बेट में देशभर से आने वाले वी.वी.आई.पी.लोगों के नाईट हाल्ट और डे सफारी के विशेषाधिकार को रोकने वाले इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। कॉर्बेट पार्क आने वाले देशी, विदेशी पर्यटकों के लिए पार्क प्रशासन ने पहले से ही पारदर्शी ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था कर रखी है।

आदेश में ये कहा गया है कि कॉर्बेट क्षेत्र से लगे हुए हिस्से में कई प्रकार के होटल और रिसॉर्ट बने हुए हैं जो इन वी.वी.आई.पियों के बजट के अनुरूप इन्हें ठहराने का प्रबंध कर सकेंगे। पार्क के छह ज़ोनों में डे सफारी और नाईट हाल्ट की व्यवस्था 15 नवंबर से 15 जून तक की जाती है, यहां हर वर्ष जज, प्रशासनिक अधिकारी व कई दूसरे वी.आई.पी.इन सेवाओं के लिए प्रार्थना पत्र देते हैं। इनके आवभगत में कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे कॉर्बेट प्रबंधन को अपने कर्मचारी इनकी सेवा में लगाने पड़ते हैं। पत्र में ये भी कहा गया है कि वन रक्षक के स्वीकृत 461 पदों में से केवल 302 वन रक्षक ही इन पार्कों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं।


संजीव चतुर्वेदी ने अपने आदेश पत्र में संविधान के आर्टिकल 14 में ‘समानता का अधिकार’ का हवाला देते हुए कहा है कि संविधान की सुंदरता में पिछले कुछ वर्षों में वी.आई.पी.कल्चर घुस गया है जिसने उसे दूषित कर दिया है। उन्होंने समानता को बढ़ाते केंद्र सरकार के उस आदेश का भी हवाला दिया है जिसमें वी.आई.पी.कल्चर खत्म करने के नाम पर वी.आई.पी.वाहनों से लाल बत्ती हटाने की शुरुवात की गई थी।
कॉर्बेट में वर्षों से प्रियंका गांधी और उनका परिवार, उच्च और अधीनस्थ न्यायालयों के जज, तमाम ब्यूरोक्रेट्स और प्रदेश व दूसरे राज्यों के मंत्री हमेशा से यहां निदेशकों के इशारे पर निःशुल्क वी.वी.आई.पी.सुविधाएं पाते रहे हैं।

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