एक्सक्लूसिव: 18 नवंबर के बाद हटाएंगे विनय गोयल को!

भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड की राजनीति में महामंत्री संगठन संजय कुमार के यौन शोषण मामले में फंसने और महानगर अध्यक्ष देहरादून विनय गोयल द्वारा संजय कुमार के साथ खड़ा होने से भाजपा असहज स्थिति का सामना कर रही है। राज्य में चल रहे निकाय चुनाव में संजय के कुकृत्यों और विनय गोयल द्वारा संघ के बारे में कही गई शारीरिक नीड वाली बात से चुनाव प्रचार पर भी जबर्दस्त प्रभाव पड़ा है। इस घटना के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, संघ, शिशु मंदिर व संगठन के तमाम लोग चुनाव प्रचार से अलग हो चुके हैं।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन हुआ तो सबसे पहले संजय कुमार का इस्तीफा लिखवाया गया। संजय कुमार के इस्तीफे के बावजूद भाजपा के भीतर मचा घमासान शांत नहीं हुआ। इस बीच पीडि़त महिला द्वारा पुलिस को प्राथमिकी दे दी गई है। देर-सबेर संजय कुमार पर मुकदमा होना भी तय है। संजय कुमार से पीछा छुड़ा रही भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ी समस्या अब विनय गोयल बन चुके हैं। चुनाव चरम पर है। ऐसे में पार्टी चाहकर भी विनय गोयल को बीच चुनाव में इसलिए नहीं हटा पा रही, क्योंकि देहरादून नगर निगम का बड़ा भाग महानगर के अंतर्गत है। पार्टी ने अब इसका हल निकाल लिया है। जिसमें यह तय किया गया है कि 18 नवंबर मतदान के दिन तक विनय गोयल को हटाया न जाए और उनकी हटाने की आधिकारिक घोषणा मतदान के बाद की जाए। पार्टी का मानना है कि यदि चुनाव के बीच में संजय कुमार की भांति विनय गोयल की भी छुट्टी की गई तो इससे विपक्ष को हमला करने का और बड़ा अवसर मिल जाएगा और फिर पूरे प्रदेश में भाजपा विपक्ष के सामने खड़ी नहीं हो पाएगी।
विनय गोयल चुनाव प्रचार में तो जा रहे हैं, किंतु उनकी बॉडी लैंग्वेज बता रही है कि उन्होंने ऐसा काम कर दिया है, जिसके कारण अब महानगर अध्यक्ष की कुर्सी से उनका जाना तय है। विनय गोयल द्वारा भी अब अपने बचाव में तमाम तरह की कोशिशें की जा रही हैं। एक तथ्य यह भी है,  जिन विनय गोयल का विवादित वीडियो है, पीडि़त महिला ने एफआईआर में विनय गोयल का नाम नहीं लिखा है। इस विषय में जब पर्वतजन ने पीड़िता से बात की तो पीड़िता का कहना था कि उन्होंने अपनी तहरीर  संक्षिप्त में  लिखी थी और वह  विनय गोयल सहित सभी जिम्मेदार व्यक्तियों  की भूमिका को विस्तार से अपने  बयानों में आने वाले दिनों में विस्तृत स्पष्ट रूप से  जिक्र करेंगी।

देखना है कि जांच के बाद जांच अधिकारी विनय गोयल को उक्त मुकदमे से किस हद तक बचा सकते हैं।

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